प्रपन्नामृत – अध्याय ५५
प्रपन्नामृत – अध्याय ५५ श्री आन्ध्रपूर्णाचार्य स्वामी की अनन्य आचार्य निष्ठा 🔹श्री आन्ध्रपूर्णाचार्य अपने आचार्य यतिराज के श्रीचरणों को ही उपाय उपेय मानकर उनकी सेवा में रहते थे। 🔹श्री आन्ध्रपूर्णाचार्य जब यतिराज के साथ रंगनाथ भगवान के दर्शन के लिये जाते तब वे रंगनाथ भगवान का दर्शन न करके यतिराज के दर्शन ही करते थे। … Read more