श्रीवचन भूषण – सूत्रं १५१
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब उनसे पूछा गया कि “भगवान ने स्वतंत्र होते हुए भी इन विभूतियों (श्रीहनुमानजी और श्रीनिषादराज) को श्रीलक्ष्मणजी और माता सीता के माध्यम (मध्यस्थ/पुरुषकार) से उनसे सम्पर्क कर स्वीकार किया जैसा कि श्रीरामायण के किष्किन्धा काण्ड ३.२७ में … Read more