श्रीवचन भूषण – सूत्रं १९५

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका उन अपचारों में से, भागवतों को उनके जन्म के आधार पर आंकने की क्रूर प्रकृति को दयापूर्वक समझाने के लिए श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी यह बताते हैं। सूत्रं – १९५ अदिले ऒन्ऱु अवर्गळ्‌ पक्कल्‌ जन्म निरूपणम्‌ | सरल अनुवाद … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १९४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी ने दयापूर्वक भागवत-अपचार के अनेक रूपों पर प्रकाश डाला है। सूत्रं – १९४ भागवत अपचारन्दान्‌ अनेक विधम्‌। सरल अनुवाद भागवतों के प्रति की गई त्रुटियाँ या अपचार अनेक प्रकार के होते हैं। व्याख्या भागवत अपचारन्दान्‌ … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १९३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी भागवत अपचार की क्रूर प्रकृति को दर्शाने हेतु भगवान के शब्दों का प्रकटीकरण करते हैं। सूत्रं – १९३ “अवमान क्रिया:” सरल अनुवाद महाभारत अश्वमेधिक पर्व “अवमान क्रिया:” (अपमानजनक कार्य)। व्याख्या भगवान ने स्वयं महाभारत अश्वमेधिक … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १९२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी एक विश्वसनीय व्यक्ति के शब्दों के माध्यम से दयालुतापूर्वक यह समझा रहे हैं कि जब भागवतों के प्रति गलतियाँ की जाती हैं तो भगवान उचित दंड देंगे। सूत्रं – १९२ “ईश्वरन्‌ अवतरित्तुप्‌ पण्णिन आनैत्‌ तॊळिल्गळ्‌ … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १९१

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका इसके बाद, श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी जले हुए वस्त्र की प्रकृति की पहचान करते हैं। सूत्रं – १९१ मडिप्पुडवै वॆन्दाल्‌ उण्डैयुम्‌ पावुम्‌ ऒत्तुक्‌ किडक्कुम्‌; काट्रडित्तवाऱे पऱन्दुपोम्‌ सरल अनुवाद जब किसी तह किए हुए वस्त्र को जलाया जाता है, तो … Read more

अन्तिमोपाय निष्ठा – १८ – निष्कर्ष – आचार्य निष्ठा की महिमा

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः अन्तिमोपाय निष्ठा << अन्तिमोपाय निष्ठा – १७ – भागवतों की अहैतुक कृपा पिछले लेख में, हमने भगवान (एम्पेरुमान्), अम्माजी (पिराट्टी), आऴ्वार् और आचार्यों के शब्दों के माध्यम से श्रीवैष्णवों की महिमा देखी। हमने सीता पिराट्टी और श्री वरवरमुनि (मामुनिगळ्) की उन लोगों के … Read more

श्री रामायण तनि श्लोकम् – ७ – बाल काण्ड २०.२ – ऊनषोडशवर्ष: – भाग २

श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमते वरवरमुनये नमः श्रीमते रङ्गदेशिकाय नमः पूरी श्रृंखला << भाग ६ ऊनषोडशवर्षो मे रामो राजीवलोचन:।न युद्धयोग्यतामस्य पश्यामि सह राक्षसै:।। १.२०.२ ।। राजा दशरथ कहते हैं— “मेरे कमलनयन श्रीराम सोलह वर्ष से कम आयु के हैं। मैं उसमें राक्षसों से युद्ध करने की योग्यता नहीं देखता।”  पिछले लेख में निम्नलिखित विषयों का निरूपण … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १९०

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब पूछा गया कि “यदि कोई भागवतों के प्रति शत्रुता रखता है तो वह अपना वास्तविक स्वरूप खो देगा; ऐसे में, यह कैसे संभव है कि जो लोग भागवतों के प्रति शत्रुता रखते हैं, उनका नाम और स्वरूप … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १८९

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका सूत्र १७९ में, “तन्नैत्‌ ताने …”, कहते हुए, अहंकार (अपने स्वरूप को भ्रमित करना,  अहंकार) और सांसारिक विषयों (सांसारिक सुख) की क्रूर प्रकृति को अलग-अलग पहचाना गया था, जो आत्मा के सच्चे स्वरूप के लिए विनाशकारी हैं; अब, … Read more

श्री शठकोप स्वामी (नम्माऴ्वार्) के दिव्य नाम – कारीमाऱन्, तिरुनावीरुडैय पिरान्

श्रीः। श्रीमते शठकोपाय नमः। श्रीमते रामानुजाय नमः। श्रीमद्वरवरमुनये नमः। पूरी श्रृंखला  << पूर्व ५. कारीमाऱन्  जैसा कि पूर्व नाम “माऱन्” में वर्णित है, माऱन् का अर्थ है – जो सामान्य सांसारिक लोगों से सर्वथा भिन्न हो, जिसका मन जन्म से ही विषय-भोगों में न जाकर (प्रवृत्त न होकर) केवल भगवान में अनुरक्त हो। “कारीमाऱन्” नाम … Read more