श्रीवचन भूषण – सूत्रं १५०
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब उनसे पूछा गया कि “क्या ऐसे कोई व्यक्ति हैं जिनमें कोई कामना नहीं थी, परन्तु भगवान ने उन्हें स्वीकार कर लिया?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी दयापूर्वक उत्तर देते हैं। सूत्रं – १५० अपेक्ष निरपेक्षमाग तिरुवडिक्कुम् श्री गुहप्पॆरुमाळुक्कुम् … Read more