श्रीवचन भूषण – सूत्रं १७२
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्री पिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक इन (भक्तों और दिव्य निवास) को लक्ष्य और साधन मानते हुए अपने आसक्ति के स्तर को समझाते हैं। सूत्रं – १७२ “कल्लुम् कनै कडलुम्” ऎन्गिऱपडिये इदु सिद्दित्ताल् अवट्रिल् आदरम् मट्टमाय् इरुक्कुम्” सरल अनुवाद … Read more