आचार्य हृदयम् – ३२
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – ३१ अवतारिका (परिचय) यहाँ इस तथ्य का स्पष्टीकरण किया गया है कि कर्मनिष्ठ (कर्म करने में एकाग्र) और कैङ्कर्यनिष्ठ (कैङ्कर्य करने में एकाग्र) के मध्य एकता नहीं है। चूर्णिका -३२ साधन साध्यङ्गळिल् मुदलुम् मुडिवुम् वर्णधर्मिगळ् दासवृत्तिगळ् … Read more