ఆచార్య హృదయం – 94

ఆచార్య హృదయం << చూర్ణిక 93 చూర్ణిక  94 అవతారికఇక మీద “ఆళ్వార్ల ప్రభావమునకు గల కారణము ఏమి?” అన్న ప్రశ్నకు సమాధానముగా “దీనికి గల కారణము – భగవానుని నిర్హేతుక కృప” అని నాయనార్లు చెప్పుచున్నారు. ఈ చూర్ణికలో ఆళ్వార్ల పూర్వ స్థితి, ఈ విధముగా ఆళ్వారు ఈ లోకమును ఉద్ధరించుటకు ఏ విధముగా అనుగ్రహింపబడ్డారు మరియు భగవానుని వల్ల ఆళ్వారు ఎలా అనుగ్రహింపబడ్డారు అనునవి వివరింపబడ్డాయి. చూర్ణికఇతుక్కు హేతు ఊళితోఴుమ్ శోమ్బాతు ఒన్ఴి ప్పొరుళెన్ఴు … Read more

ఆచార్య హృదయం – 93

ఆచార్య హృదయం << చూర్ణిక-92 చూర్ణిక  93 అవతారికజ్ఞానులు అయినవారు ఆళ్వార్ల స్వరూపమును శంకించుట అనునది ఆళ్వార్ల గొప్పతనము వల్లనే అని నాయనార్లు ఇక మీద వివరించుచున్నారు. చూర్ణికఇతుక్కు మూలమ్ యాన్ నీ యెన్ఴు మఴుతలైత్తు వానత్తు మణ్ మిశై మాఴుమ్ నికరుమిన్ఴి నిలైయిడమ్ తెరియాతే తెయ్ వత్తినమ్ ఒరువకైక్కొప్పాక ఇనత్తలైవన్ అన్దామత్తు అన్బుశెయ్య శేర్ న్దమైక్కు అడైయాళముళవాక ఉకన్దుకన్దు తిమిర్ కొణ్డాలొత్తు నాట్టియల్ వొళిన్దు శఠరయోట్టి మదావలిప్తర్ క్కు అఞ్కుశమిట్టు నడావియ కూత్తమాయ్ తీయనమరుఙ్గు వారామల్ … Read more

आचार्य हृदयम् – ३०

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – २९ अवतारिका (परिचय) नायनार् के वचन हैं कि कर्म और कैङ्कर्य इस प्रकार इन अवस्थाओं के कारण हैं। चूर्णिका – ३० इवट्राले साधारणम् असाधारणम् ऎन्नुम्। सरल व्याख्या इन के द्वारा, भगवान के साधारण और असाधारण रूपों … Read more

आचार्य हृदयम् – २९

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः  श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – २८ अवतारिका (परिचय) इनके लक्ष्य यहाँ समझाए किए गए हैं। चूर्णिका -२९ अरुळ् मुडिय निऱुत्ति अडैय निन्ऱदुम् नल्लदोररुळ् तन्नाले नन्ऱुम् ऎळियनागिऱदुम् विषयम्। सरल व्याख्या कर्म का विषय है देवताएँ जो ईश्वर द्वारा नियुक्त किए गए हैं और जिनमें अंतर्यामी रूप में भगवान‌ … Read more

आचार्य हृदयम् – २८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – २७ अवतारिका (परिचय) इनके धाम के विषय में यहाँ वर्णन किया गया है। चूर्णिका २८ मण्डिनारुम् मट्रैयारुम् आश्रयम् सरल व्याख्या ऐसे कैङ्कर्यों और कर्मों के धाम क्रमशः दिव्य देश में एकाग्रचित्त रहने वाले और अन्य जन हैं। … Read more

आचार्य हृदयम् – २७

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः  श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – २६ अवतारिका (परिचय) इन दोनों (कर्म, कैङ्कर्य) के लिए प्रेरक यहाँ बताए गए हैं। चूर्णिका – २७ इवट्रुक्कु विधिराङ्गळ् प्रेरङ्गळ्। सरल व्याख्या नियम और इच्छा इनके लिए प्रेरक हैं। व्याख्यान (टीका) अर्थात – शास्त्र के नियम जैसे कि यजुर्वेद “यजेत” (यज्ञ करना … Read more

आचार्य हृदयम् – २६

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला <<आचार्य हृदयम् – २५ अवतारिका (परिचय) उन व्यक्तियों के लिए कर्म और कैङ्कर्य, क्रिया और वृत्ति द्वारा संचालित होने पर क्या समानता है, इसकी व्याख्या की गई है। चूर्णिका – २६ कर्म कैङ्कर्यङ्गळ् सत्य असत्य नित्य अनित्य वर्ण दास्य अनुगुणङ्गळ्। सरल व्याख्या … Read more

आचार्य हृदयम् – २५

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः  श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – २४ अवतारिका (परिचय) जब प्रश्न किया गया कि, “परंतु जो लोग कैङ्कर्य में लगे हुए हैं, उनके लिए भी शेषत्व और भोक्तृत्व है, उनका उद्देश्य क्या है”, इसका उत्तर इस प्रकार यहाँ दिया गया। चूर्णिका – २५ मुऱ्-पाडर्क्कु क्रियाङ्गमानवै इरण्डुम् सॆयल्  तीर्न्दार् … Read more

आचार्य हृदयम् – २४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः  श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – २३ अवतारिका (परिचय) तत्पश्चात्, जैसे कि चूर्णिका १९ “शास्त्रिगळ्..” में वर्णित है, जो प्रवृत्तिपरार् (कर्मों में संलग्न) और निवृत्तिपरार् ([अनावश्यक] कर्मों को त्यागने वाले) कहे गए हैं, जिनके पास क्रमशः स्वरूप ज्ञान और स्वरूप याथात्म्य ज्ञान है ऐसे सुयोग्य पुरुषों को क्या … Read more

आचार्य हृदयम् – २३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः  श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – २२ अवतारिका (परिचय) इस तर्कानुसार, पारतन्त्र्य आदि जो स्वरूप यथात्म्य ज्ञान अवस्था (स्वयं के आंतरिक वास्तविक स्वरूप का ज्ञान होना) में दर्शाए गए हैं, उन गुणों के द्वारा स्वरूप ज्ञान अवस्था (स्वयं के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान होना) में दर्शाए गए शेषत्व … Read more