आचार्य हृदयम् – ३४
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – ३३ अवतारिका (परिचय) इस प्रकार सर्वश्रेष्ठ जन्म प्राप्त करने के विषय का स्पष्टीकरण किया जाता है। चूर्णिका ३४ अन्दणर् मऱैयोर् ऎन्ऱुम् अडियार् तॊण्डरॆन्ऱुम् इवर्गळुक्कु निरूपकम्। सरल व्याख्या – कर्मनिष्ठ जनों का परिचय अन्दणर् और मऱैयोर् के रूप … Read more