आचार्य हृदयम् – ३१
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – ३० अवतारिका (परिचय) नायनार दयापूर्वक उदाहरण सहित समझा रहे हैं कि जो लोग विशिष्ट कार्य में (कैङ्कर्य) में संलग्न रहते हैं, उनके साधारण कर्तव्य स्वभाविकत: ही दूर हो जाते हैं। चूर्णिका -३१ जात्याश्रम दीक्षैगळिल् भेदिक्कुम् धर्मङ्गळ् … Read more