श्रीवचन भूषण – सूत्रं १४६

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका इससे पूर्व श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी ने कृपापूर्वक समझाया था कि जब चेतन द्वारा की गई प्रपत्ती भगवान जो कि शरण हैं, उनके दिव्य हृदय के साथ संरेखित नहीं होती है, तो उसे अपराध माना जाएगा; आगे, यह दर्शाने … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १४५

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब उनसे पूछा गया कि “इन व्यक्तित्वों में ये सिद्धांत कैसे दिखाई देते हैं?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक समझाते हैं। सूत्रं – १४५ श्री भरताऴ्वानुक्कु, नन्मैदाने तीमैयाय्त्तु; श्री गुहप्पॆरुमाळुक्कु तीमैदाने नन्मैयाय्त्तु। सरल अनुवाद श्रीभरतजी के लिए अच्छे … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १४४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब उनसे पूछा गया कि “क्या हम इन दो सिद्धांतों [पिछले दो सूत्रों में समझाए गए] को कहीं भी प्रदर्शित होते हुए देख सकते हैं?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी दयापूर्वक समझाते हैं। सूत्रं – १४४ इवै इरण्डुम, श्री … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १४३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका अब, श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी उस अंतर को समझा रहे हैं जब भगवान स्वयं चेतन को स्वीकार करते हैं। सूत्रं – १४३ अवन्‌ इवनैप्पॆऱ निनैक्कुम्बोदु पातकमुम्‌ विलक्कन्ऱु सरल अनुवाद जब भगवान किसी चेतन को स्वीकार करना चाहते हैं, तो … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १४२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका तत्पश्चात, श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक प्रपत्ती के अनुपायत्व (साधन न होना) और उसके विपरीत, जो परगत स्वीकार (भगवान द्वारा अपनी इच्छा से स्वीकार किया जाना) है, को उपाय (साधन) समझा रहे हैं जिनकी व्याख्या पहले क्रमशः सूत्र ५४ … Read more

आचार्य हृदयम् – ३१

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – ३० अवतारिका (परिचय) नायनार दयापूर्वक उदाहरण सहित समझा रहे हैं कि जो लोग विशिष्ट कार्य में (कैङ्कर्य) में संलग्न रहते हैं, उनके साधारण कर्तव्य स्वभाविकत: ही दूर हो जाते हैं। चूर्णिका -३१ जात्याश्रम दीक्षैगळिल् भेदिक्कुम् धर्मङ्गळ् … Read more

आचार्य हृदयम् – ३०

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – २९ अवतारिका (परिचय) नायनार् के वचन हैं कि कर्म और कैङ्कर्य इस प्रकार इन अवस्थाओं के कारण हैं। चूर्णिका – ३० इवट्राले साधारणम् असाधारणम् ऎन्नुम्। सरल व्याख्या इन के द्वारा, भगवान के साधारण और असाधारण रूपों … Read more

आचार्य हृदयम् – २९

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः  श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – २८ अवतारिका (परिचय) इनके लक्ष्य यहाँ समझाए किए गए हैं। चूर्णिका -२९ अरुळ् मुडिय निऱुत्ति अडैय निन्ऱदुम् नल्लदोररुळ् तन्नाले नन्ऱुम् ऎळियनागिऱदुम् विषयम्। सरल व्याख्या कर्म का विषय है देवताएँ जो ईश्वर द्वारा नियुक्त किए गए हैं और जिनमें अंतर्यामी रूप में भगवान‌ … Read more

आचार्य हृदयम् – २८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – २७ अवतारिका (परिचय) इनके धाम के विषय में यहाँ वर्णन किया गया है। चूर्णिका २८ मण्डिनारुम् मट्रैयारुम् आश्रयम् सरल व्याख्या ऐसे कैङ्कर्यों और कर्मों के धाम क्रमशः दिव्य देश में एकाग्रचित्त रहने वाले और अन्य जन हैं। … Read more

श्रीवैष्णव दैनिक दिनचर्या

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रीवैष्णवों को अपने दैनिक जीवन में एक अनुशासित और मानक दिनचर्या का पालन करना चाहिए। प्रत्येक गतिविधि केवल हमारे सम्प्रदाय पर ही केंद्रित होनी चाहिए। टिप्पणियाँ: संदर्भ (लिंक्स सहित): स्रोत : https://granthams.koyil.org/2026/03/30/srivaishnava-daily-routine-english/ अडियेन् रोमेश रामानुज दास संग्रहीत : http://divyaprabandham.koyil.org प्रमेय (लक्ष्य) – http://koyil.orgप्रमाण (शास्त्र) … Read more