श्रीवचन भूषण – सूत्रं २१४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्री पिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी दयापूर्वक उस जन्म में ऐसी कमियों के न होने के विषय में बताते हैं जो पहले बताए गए जन्म के सर्वथा विपरीत है। सूत्रं – २१४ अपकृष्टमाग भ्रमित्त उत्कृश्ट जन्मत्तुक्कु इरण्डु दोषमुम्‌ इल्लै … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं २१३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्री पिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी दयापूर्वक इस बात की एक और कमी बताते हैं [जिसे श्रेष्ठ जन्म मानकर भ्रम होता है]। सूत्रं – २१३ अदुक्कु स्वरूप प्राप्तमान नैच्यम्‌ भाविक्क वेणुम्‌। सरल अनुवाद जिसका जन्म तथाकथित रूप से उच्च … Read more

श्री शठकोप स्वामी (नम्माऴ्वार्) के दिव्य नाम – वकुलाभरण, वकुलभूषण भास्कर

श्रीः। श्रीमते शठकोपाय नमः। श्रीमते रामानुजाय नमः। श्रीमद्वरवरमुनये नमः। पूरी श्रृंखला  << पूर्व ९. वकुलाभरण  वकुलाभरण श्री शठकोप सूरी का संस्कृत दिव्यनाम है। वकुल (बकुल/मगिऴम्) एक अत्यंत सुगंधित पुष्प है, जिसे तमिऴ् भाषा में “मगिऴम् पू” कहा जाता है। श्री शठकोप सूरी सदैव इस दिव्य वकुल-पुष्पमाला से विभूषित रहते हैं, यही कारण है कि उन्हें … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं २१२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्री पिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी इसे विस्तार से बता रहे हैं। सूत्रं – २१२ उत्कृष्टमाग भ्रमित्त जन्मम्‌ भ्रम्श सम्भावनैयाले “शरीरे च” ऎन्गिऱपडिये भय जनकम्‌ | सरल अनुवाद जिस जन्म को श्रेष्ठ समझा गया था वही अब डर का … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं २११

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी दयापूर्वक उस दृष्टिकोण से उत्तर प्रदान कर रहे हैं जिसमें प्रश्नकर्ता के विचार को विपरीत रूप से समझाया जाता है – अर्थात् जिसे प्रश्नकर्ता उत्तम मानता है उसे निम्न समझना और जिसे वह निम्न … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं २१०

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी यह प्रश्न उठाते हैं कि “जब ऊँचे और नीचे कुल में जन्मे लोग भगवान से जुड़े होते हैं, तो ‘भागवत’ होने के नाते वे समान होते हैं; तो भी, क्या ऊँचे कुल में जन्मा … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं २०९

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब यह पूछा गया कि “ऐसे में, लाभ या हानि का कारण क्या है?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी ने कृपापूर्वक उत्तर दिया। सूत्रं – २०९ प्रयोजकम्‌ भगवत्‌ सम्बन्धमुम्‌ असम्बन्धमुम्‌। सरल अनुवाद इसका कारण भगवान के साथ सम्बन्ध … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं २०८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब यह पूछा गया कि “इस तरह (जैसा कि पिछले सूत्रों में बताया गया है), अगर ऊँचे कुल में जन्म आदि से हानि हो सकता है, तो क्या निचले कुल में जन्म आदि से वांछित फल मिल … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं २०७

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब यह पूछा गया कि “क्या आप कह सकते हैं कि जन्म पर आधारित महानता का कोई मूल्य नहीं है? क्या सभी शास्त्र ब्राह्मणत्व का महिमामंडन नहीं करते?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी ने इसके पश्चात इस विषय को … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं २०६

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब यह पूछा गया कि “क्या यह सिद्धान्त कहीं देखने को मिलता है?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक उत्तर देते हैं। सूत्रं – २०६ इव्वर्थम्‌, कैशिक वृत्तान्तत्तिलुम्‌, उपरिचरवसु वृत्तान्तत्तिलुम्‌ काणलाम्‌. सरल अनुवाद यह सिद्धांत कैशिक और उपरिचरवसु की … Read more