শ্রীরাম লীলা ও ইহার সার – সুন্দর কাণ্ড

শ্রী: শ্রীমতে শঠকোপায় নমঃ শ্রীমতে রামানুজায় নমঃ শ্রীমদ বরবরমুিনয়ে নমঃ শ্রীরাম লীলা ও ইহার সার << কিষ্কিন্ধা কাণ্ড অত্যন্ত শক্তিশালী হনুমানজি বিশাল মহাসাগর অতিক্রম করে অশোকবাটিকায় প্রবেশ করলেন, যা লঙ্কার অভ্যন্তরে অবস্থিত ছিল এবং বহু দুর্গ দ্বারা পরিবেষ্টিত ছিল। সেখানে তিনি মাতা সীতার কাছে পৌঁছালেন। তিনি বৈদেহী (পিরাট্টি)-র সঙ্গে সাক্ষাৎ করলেন এবং শ্রীরামের ইতিহাস বিস্তারিতভাবে … Read more

শ্রীরাম লীলা ও ইহার সার – কিষকিন্ধা কাণ্ড

শ্রী: শ্রীমতে শঠকোপায় নমঃ শ্রীমতে রামানুজায় নমঃ শ্রীমদ বরবরমুিনয়ে নমঃ শ্রীরাম লীলা ও ইহার সার << আরণ্য কাণ্ড যখন শ্রীরাম অনুজ লক্ষ্মণের সহিত পম্পা সরোবরের তীরে পৌঁছালেন, তখন তাঁরা সেখানকার প্রাকৃতিক সৌন্দর্য দেখলেন এবং দুঃখী হয়ে গেলেন, কারণ জননী সীতার বিচ্ছেদের কারণে  এর আনন্দ উপভোগ করতে পারছিলেন না। তাঁরা অত্যন্ত শোক করলেন। সেই সময়ে, সুগ্রীব … Read more

শ্রীরাম লীলা ও ইহার সার – আরণ্য কাণ্ড

শ্রী: শ্রীমতে শঠকোপায় নমঃ শ্রীমতে রামানুজায় নমঃ শ্রীমদ বরবরমুিনয়ে নমঃ শ্রীরাম লীলা ও ইহার সার << অযোধ্যা কাণ্ড দণ্ডকারণ্য পৌঁছানোর পর, সেখানে বসবাসকারী ঋষিগণ আগমন করলেন এবং শ্রীরাম, মাতা সীতা ও লক্ষ্মণজীর সাথে সাক্ষাৎ করলেন। শ্রীরাম তাঁদের কষ্টের কথা শুনলেন এবং বুঝতে পারলেন যে রাক্ষসরা তাঁদের ওপর খুব অত্যাচার করেছে। তিনি তাঁদের সাহায্য করার প্রতিশ্রুতি … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १६६

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी हमें भगवान के शब्दों का स्मरण दिलाते हुए इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि यह केवल सांसारिक उदाहरण में ही नहीं, परंतु पिराट्टी के प्रति भगवान के दृष्टिकोण में भी देखा जाता है। सूत्रं … Read more

आचार्य हृदयम् – ३४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – ३३ अवतारिका (परिचय) इस प्रकार सर्वश्रेष्ठ जन्म प्राप्त करने के विषय का स्पष्टीकरण किया जाता है। चूर्णिका ३४ अन्दणर् मऱैयोर् ऎन्ऱुम् अडियार् तॊण्डरॆन्ऱुम् इवर्गळुक्कु निरूपकम्। सरल व्याख्या – कर्मनिष्ठ जनों का परिचय अन्दणर् और मऱैयोर् के रूप … Read more

শ্রীরাম লীলা ও ইহার সার – অযোধ্যা কাণ্ড

শ্রী: শ্রীমতে শঠকোপায় নমঃ শ্রীমতে রামানুজায় নমঃ শ্রীমদ বরবরমুিনয়ে নমঃ শ্রীরাম লীলা ও ইহার সার << বাল কাণ্ড সবাই অযোধ্যায় পৌঁছালেন এবং সেখানে খুব আনন্দের সাথে বসবাস করতে লাগলেন। ভগবান শ্রীরাম এবং মাতা সীতা ১২ বছর পর্যন্ত আনন্দের সাথে একসাথে রইলেন। একবার চক্রবর্তী রাজা দশরথ তাঁর পুত্র শ্রীরামকে রাজসিংহাসনে বসানোর ইচ্ছা প্রকাশ করলেন। তিনি একটি … Read more

आचार्य हृदयम् – ३३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – ३२ अवतारिका (परिचय) इस चूर्णिका से पहले की चूर्णिकाओं में,  नायनार् ने ३१वीं चूर्णिका में कर्म और कैङ्कर्य के अधिकार (योग्यता) में अंतर बताया; ३२वीं चूर्णिका में उन्होंने इस सम्बन्ध को विच्छेद करने के लिए बड़ा अन्तर … Read more

आचार्य हृदयम् – ३२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – ३१ अवतारिका (परिचय) यहाँ इस तथ्य का स्पष्टीकरण किया गया है कि कर्मनिष्ठ (कर्म करने में एकाग्र) और कैङ्कर्यनिष्ठ (कैङ्कर्य करने में एकाग्र) के मध्य एकता नहीं है। चूर्णिका -३२ साधन साध्यङ्गळिल् मुदलुम् मुडिवुम् वर्णधर्मिगळ् दासवृत्तिगळ् … Read more

श्री रामायण तनि श्लोकम् – ६ – बाल काण्ड २०.२ – ऊनषोडशवर्ष: – भाग १

श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमते वरवरमुनये नमः श्रीमते रङ्गदेशिकाय नमः पूरी श्रृंखला << भाग ५ ऊनषोडशवर्षो मे रामो राजीवलोचन:।न युद्धयोग्यतामस्य पश्यामि सह राक्षसै:।। श्री कृष्णपाद आचार्य (पेरियवाच्चान् पिळ्ळै) ने, जो शरणागति-शास्त्र माना जाता है अर्थात श्रीरामायणम् के अनेक महत्त्वपूर्ण श्लोकों पर अत्यन्त गम्भीर और विस्तृत व्याख्यान लिखा है। इस श्रृंखला में अब तक बालकाण्ड के १९.१४वें … Read more

श्री शठकोप स्वामी (नम्माऴ्वार्) के दिव्य नाम – शठकोप, तोण्डर् पिरान्

श्रीः। श्रीमते शठकोपाय नमः। श्रीमते रामानुजाय नमः। श्रीमद्वरवरमुनये नमः। पूरी श्रृंखला << नम्माऴ्वार् १. श्री शठकोप दिव्य नाम की महिमा “शठकोप” नम्माऴ्वार् का सर्वाधिक प्रसिद्ध एवं परम पावन संस्कृत नाम है। स्वयं आऴ्वार् ने भी अपने दिव्यप्रबन्धों में अनेक स्थानों पर इस नाम का उल्लेख किया है। श्रीसम्प्रदाय में इस नाम का इतना माहात्म्य है … Read more