श्रीवचन भूषण – सूत्रं १७८
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्री पिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक उदाहरण सहित समझाते हैं, “इतना ही नहीं, यदि कोई भगवान की अवहेलना करते हुए स्वयं ही भलाई की अन्वेषण करता है, तो यह केवल विनाश की ओर ले जाएगा।” सूत्रं – १७८ अवनै … Read more