श्रीवचन भूषण – सूत्रं १८०
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका तत्पश्चात श्री पिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक स्वयं को नष्ट करने के ज्ञान को समझाते हैं। सूत्रं – १८० तन्नैत् ताने मुडिक्कैयावदु – अहंकारत्तैयुम् विषयन्गळैयुम् विरुम्बुगै | सरल अनुवाद स्वयं का नाश करने का अर्थ है अहंकार (शरीर को … Read more