श्रीवचनभूषण – सूत्रं १४४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम:

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अवतारिका

जब उनसे पूछा गया कि “क्या हम इन दो सिद्धांतों [पिछले दो सूत्रों में समझाए गए] को कहीं भी प्रदर्शित होते हुए देख सकते हैं?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी दयापूर्वक समझाते हैं।

सूत्रं – १४४

इवै इरण्डुम, श्री भरताऴ्वान् पक्कलिलुम् श्री गुहप्पॆरुमाळ् पक्कलिलुम् काणलाम्‌।

सरल अनुवाद

ये दोनों सिद्धांत श्री भरतजी और श्री गुह महाराज में क्रमशः देखे जा सकते हैं।

व्याख्या

कोई विशेष टिप्पणी नहीं। 

अडियेन् केशव रामानुज दास

आधार: https://granthams.koyil.org/2021/06/28/srivachana-bhushanam-suthram-144-english/

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