श्रीवचन भूषण – सूत्रं १८८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्री पिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक उन दो प्रकार के व्यक्तित्वों के मध्य में अंतर स्पष्ट करते हैं जिन्हें उदाहरण के रूप में दिखाया गया है। सूत्रं – १८८ केवल नास्तिकनैत्‌ तिरुत्तलाम्‌; आस्तिक नास्तिकनै ऒरुनाळुम्‌ तिरुत्त ऒण्णादु. सरल अनुवाद … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १८७

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्री पिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक उन लोगों के मध्य अंतर समझा रहे हैं जो सांसारिक सुखों के स्वभाव को जाने बिना उनमें लिप्त हैं और उन लोगों के मध्य जो सांसारिक सुखों के स्वभाव को भली-भाँति जानते हुए … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १८६

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्री पिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी ने एक प्रामाणिक व्यक्तित्व के शब्दों में इस सिद्धांत को स्पष्ट किया है। सूत्रं – १८६ “काट्टिप्‌ पडुप्पायो” ऎन्नक्‌ कडवदिऱे सरल अनुवाद श्रीसहस्रगीति ६.९.९ में स्पष्ट रूप से कहा गया है “काट्टिप्‌ पडुप्पायो”  (क्या … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १८५

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका इससे पहिले श्री पिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी ने समझाया था कि सांसारिक सुखों के सम्पर्क में आने से सच्चे स्वरूप का विनाश होता है और सांसारिक सुखों के माध्यम से आनंद प्राप्त करने का प्रयास विपरीत ज्ञान का परिणाम … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १८४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्री पिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक समझाते हैं कि इन सांसारिक सुखों के प्रति आसक्ति रखना, जो विनाशकारी हैं और उनमें आनंद की अन्वेषण करना, विपरीत ज्ञान (किसी सत्ता के स्वरूप को गलत समझना) का परिणाम है, जिसका उदाहरण … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १८३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका इस प्रकार, श्री पिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी ने पहले अहंकार की क्रूर प्रकृति को दयापूर्वक समझाया था; अब वे सांसारिक सुखों की क्रूर प्रकृति को दयापूर्वक समझा रहे हैं। सूत्रं – १८३ प्रतिकूल विषय स्पर्शम्‌ विष स्पर्शम्पोले; अनुकूल विषय … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १८२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका इसके पश्चात, श्री पिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी इस अहंकार की क्रूर प्रकृति के प्रमाण (शास्त्रीय प्रमाण) प्रस्तुत कर रहे हैं। सूत्रं – १८२ “न काम कलुशम्‌ चित्तम्‌”, “न हि मे जीवितेनार्त्त”, “न देहं‌”, “एम्मा वीट्टुत्‌ तिरमुम्‌” सरल अनुवाद जितन्ता … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १८१

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्री पिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी ने अपने दिव्य हृदय में इन अहंकार आदि की क्रूर प्रकृति को समझाने का विचार करते हुए सर्वप्रथम अहंकार की क्रूर प्रकृति का वर्णन किया। सूत्रं – १८१ अहंकारम्‌ अग्नि स्पर्शम्पोले  सरल अनुवाद अहंकार … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १८०

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका तत्पश्चात श्री पिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक स्वयं को नष्ट करने के ज्ञान को समझाते हैं। सूत्रं – १८० तन्नैत्‌ ताने मुडिक्कैयावदु –  अहंकारत्तैयुम्‌ विषयन्गळैयुम्‌ विरुम्बुगै | सरल अनुवाद स्वयं का नाश करने का अर्थ है अहंकार (शरीर को … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १७९

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब पूछा गया, “क्या वह स्वयं को नष्ट कर लेगा?” तो श्री पिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी ने दयापूर्वक उत्तर दिया। सूत्रं – १७९ तन्नैत्‌ तानेयिऱे मुडिप्पान्‌। सरल अनुवाद वह स्वयं को नष्ट कर देगा।  व्याख्या तन्नैत्‌ ताने… अर्थात्, क्योंकि … Read more