श्रीवचन भूषण – सूत्रं १६३
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब पूछा गया, “तो क्या परातंत्र्यम् अच्छा है?” तो श्री पिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी ने दयापूर्वक उत्तर दिया। सूत्रं – १६३ पुण्यम्पोले पारतन्त्र्यमुम् परानुभवत्तुक्कु विलक्कु। रल अनुवाद जिस प्रकार पुण्य (शेषत्व – दासता) से विमुख होना चाहिए, उसी प्रकार … Read more