श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः
अवतारिका (परिचय)
इस प्रकार सर्वश्रेष्ठ जन्म प्राप्त करने के विषय का स्पष्टीकरण किया जाता है।
चूर्णिका ३४
अन्दणर् मऱैयोर् ऎन्ऱुम् अडियार् तॊण्डरॆन्ऱुम् इवर्गळुक्कु निरूपकम्।
सरल व्याख्या –
कर्मनिष्ठ जनों का परिचय अन्दणर् और मऱैयोर् के रूप में और कैङ्कर्य निष्ठों का परिचय अडियार् और तॊण्डर् के रूप में किया जाता है।
व्याख्यान (टीका)
कर्मनिष्ठ जनों के लिए वर्ण जो देह पर आधारित है, जो आत्मा का विशेषण (गुण) है और फलस्वरूप वैदिकत्व (वैदिक होना) पहचान है जैसे कि तिरुमालै ४३ में, “सादि अन्दणर्” (ब्राह्मण वर्ग से संबंधित), पेरिय तिरुमोऴि १५.९, “तुणै नूल् मार्विन् अन्दणरुम्” (वे ब्राह्मण जिनका वक्षस्थल दो यज्ञोपवीत से सुशोभित है), पेरिय तिरुमोऴि ७.९.७ “ती ऒम्बु कै मऱैयोर्” (वे ब्राह्मण जो अग्निहोत्र हैं ) पेरिय तिरुमोऴि ६.७.८ “नन्दा वण्कै मऱैयोर्” (उदार हस्त ब्राह्मण)।
कैङ्कर्यनिष्ठों के लिए, ज्ञान और आनन्द से अधिक, शेषत्व के आन्तरिक गुण और फलस्वरूप किञ्चितकरत्वम् (अल्प सेवा प्रदान करना) ही पहचान है जैसे कि तिरुवाय्मोऴि ५.६.११ में वर्णित है, “तिरुमाल् अडियार्” (श्रीमन्नारायण का दिव्य दास), पेरुमाळ् तिरुमोऴि १.१० “अणि अरङ्गन् तिरुमुट्रत्तु अडियार्” (श्रीवैष्णव, श्रीरङ्गम् मंदिर के दिव्य प्राङ्गण के भीतर) तिरुवाय्मोऴि ६.९.११ “तिरुमालुक्कु उरिय तॊण्डर्” (श्रीमन्नारायण के योग्य दास) और तिरुवाय्मोऴि ३.७.४ “तिरुनारणन् तॊण्डर्” (श्रीमन्नारायण के दास)।
अडियेन् अमिता रामानुजदासी
आधार – https://granthams.koyil.org/2024/03/28/acharya-hrudhayam-34-english/
संगृहीत- https://granthams.koyil.org/
प्रमेय (लक्ष्य) – https://koyil.org
प्रमाण (शास्त्र) – https://granthams.koyil.org
प्रमाता (आचार्य) – https://acharyas.koyil.org
श्रीवैष्णव शिक्षा/बालकों का पोर्टल – https://pillai.koyil.org