श्री रामायण तनि श्लोकम् – ३ – बाल काण्ड १९.१४ – अहं वेद्मि – भाग २
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री रंगदेशिकाय नम: पूरी श्रृंखला << भाग १ अहं वेद्मि महात्मानं रामं सत्यपराक्रमम् ।वसिष्ठोऽपि महातेजा ये चेमे तपसि स्थिताः ।। १.१९.१४ ।। वन में राक्षस ऋषियों को हिंसा करते हैं; वे रक्त, मांस आदि दूषित वस्तुओं को यज्ञों में डालकर यज्ञ करने में विघ्न डालते हैं। राक्षसों … Read more