द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् 14

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् << भाग 13 मूल लेखन – पेरुमाल कोइल श्री उभय वेदांत प्रतिवादि अन्नन्गराचार्य स्वामी हिंदी अनुवाद – कार्तिक श्रीहर्ष तिरुप्पावै जीयर तिरुवर‍ङ्गत्तमुदानार् श्रीरामानुज स्वामीजी को ”चूडिक्कोदुत्तवल् तोल्लरुऴाल् वाऴ्गिन्द्र” से प्रसंशा करते हैं । स्वामी रामानुजाचार्य केवल श्रीआण्डाल अम्माजी के स्वाभाविक कृपा बल … Read more

द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् 13

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् << भाग 12 मूल लेखन – पेरुमाल कोइल श्री उभय वेदांत प्रतिवादि अन्नन्गराचार्य स्वामी हिंदी अनुवाद – शिल्पा रंदाद गजेन्द्र मोक्ष पिछले भाग में हमने यह देखा कि श्री रामानुज स्वामीजी द्वारा दिया हुआ अनुवाद आल्वार के पद पर ही आधारित हैं: … Read more

द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् 12

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् << भाग 11 श्री पेरुमाळ कोईल महामहोपाध्याय जदगाचार्य सिंहासनाधिपति उभय वेदान्ताचर्य प्रतिवादि भयंकर श्री अणंगराचार्य स्वामीजी के कार्य पर आधारितII अवतार प्रयोजन भगवद गीता में भगवान श्रीकृष्ण केहते हैं ”परित्राणाय साधूनां विनाशाया च दुष्कृताम। धर्मसंस्थापनार्थय सम्भवामि युगे युगे॥” अच्छाई कि रक्षा के … Read more

द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् 11

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् << भाग 10 साम्राज्य पट्टाभिशेखम भक्तों के लिए गद्यत्रय मंगल हैं। शरणागति गद्यम विभाग में श्री रामानुज स्वामीजी ने शुरु में अखिलहेयप्रत्यनीक यह भगवान के सर्वोत्तम स्वभाव को, उनके श्रेष्ठ आकार को, उनके शुभ भाव को, उनके श्रेष्ठ और सुन्दर आभुषण को, … Read more

ड्रमिडोपनिषड् प्रभाव् सर्वस्वम् 10

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् << भाग 9 भगवान नारायण ही परम नियंत्रक हैं भगवद रामानुजाचार्य ने यह पहचाना और स्पष्ट किया की श्रीरंगम के श्रीरंगनाथ भगवान ही सभी चेतन और अचेतन जीवों के परम नियंत्रक हैं। श्रीरड्ग गद्य कि शुरुवात ही “स्वाधीन त्रिविध चेतनाचेतन स्वरूपस्थिति प्रवृत्तिभेदमं” … Read more

द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् 9

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् << भाग 8 श्री पेरुमाळ कोईल महामहोपाध्याय जदगाचार्य सिंहासनाधिपति उभय वेदान्ताचर्य प्रतिवादि भयंकर श्री अणंगराचार्य स्वामीजी के कार्य पर आधारितII इस लेख में, हम श्री रामानुजाचार्य स्वामीजी के कप्यासा पर लिखित टीकाओं को जाचेंगे और इसे आलवारों कि स्तुतियों कि सोच से … Read more

द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् 8

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् << भाग 7   श्री पेरुमाळ कोईल महामहोपाध्याय जदगाचार्य सिंहासनाधिपति उभय वेदान्ताचर्य प्रतिवादि भयंकर श्री अणंगराचार्य स्वामीजी के कार्य पर आधारितII (i) पुण्डरीकाक्ष भगवान ही परब्रम्ह है| छांदयोग्य उपनिषद में परब्रम्ह को ही कमल नयन वाले या पुण्डरीकाक्ष नाम से पहचाना गया … Read more

द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् 7

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचलमहामुनये नमः द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् << भाग 6   श्री पेरुमाळ कोईल महामहोपाध्याय जदगाचार्य सिंहासनाधिपति उभय वेदान्ताचर्य प्रतिवादि भयंकर श्री अणंगराचार्य स्वामीजी के कार्य पर आधारितII समुद्र और भगवत्कल्याणगुण साधारणतः हमारे पूर्वाचार्यों ने अपने ग्रंथों मे सागर को उपमान मानते हुए भगवान को समस्त-कल्याण-गुण-सागर … Read more

द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् 6

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचलमहामुनये नमः द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् << भाग 5 आल्वार् और भगवद्रामानुजाचार्य – २ परित्राणाय साधूनाम् श्रीमद्भगवद्गीता का चतुर्थाध्याय श्लोक सर्वप्रसिद्ध है | “परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् | धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे || ” सामान्य व्यक्ति को भी यह अर्थ समझ पडता है कि … Read more

द्रमिडोपनिषत प्रभाव् सर्वस्वम् 5

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचलमहामुनये नमः द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् << भाग 4   आल्वार और भगवद रामानुज स्वामीजी  श्री वरवरमुनी स्वामीजी कहते हैं, “यह वास्तव में रामानुज दर्शन है, जैसे श्री शठकोप स्वामीजी ने बताया था।” श्रीवैष्णव संप्रदायेतर संप्रदाय भी यह मानते हैं की देशव्यापी (और विश्वव्यापी) भक्ति … Read more