द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् 14
श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् << भाग 13 मूल लेखन – पेरुमाल कोइल श्री उभय वेदांत प्रतिवादि अन्नन्गराचार्य स्वामी हिंदी अनुवाद – कार्तिक श्रीहर्ष तिरुप्पावै जीयर तिरुवरङ्गत्तमुदानार् श्रीरामानुज स्वामीजी को ”चूडिक्कोदुत्तवल् तोल्लरुऴाल् वाऴ्गिन्द्र” से प्रसंशा करते हैं । स्वामी रामानुजाचार्य केवल श्रीआण्डाल अम्माजी के स्वाभाविक कृपा बल … Read more