प्रपन्नामृत – अध्याय ६६

श्रीभूतपुरी माहात्म्य 🔹श्रीरामानुजाचार्य वैकुण्ठ गमन से ३दिन पुर्व अहर्निश गूढार्थ का उपदेश देते रहे। 🔹यतिराज ने सभी शिष्योंको बताया की उनका ४ दिनमें वैकुण्ठगमन निश्चित है। 🔹सभी शिष्य दु:खी होकर शरीर त्यागनेके लिये तैय्यार होगये तो यतिराजने बताया, “मेरे वियोगमें शरीर त्यागोगे तो पतित होजाओगे” 🔹शिष्य बोले, “हम आपकी सेवाके बिना एक क्षण भी नही … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ६५ श्री यतिराज के द्वारा ७४ वाक्यों का उपदेश 🔹परम ऐश्वर्य सम्पन्न श्रीरामानुजाचार्य के भूमण्डल में रहते हुये १२० वर्ष होगये। 🔹उन्होने जीवनके ६० वर्ष श्रीरंगम में व्यतीत किये। 🔹अब यतिराज ने वैकुण्ठ जाने का निश्चय किया और यह निश्चय भगवान को निवेदन किया। 🔹भगवान ने अनुमति प्रदान की और वर माँगनेको … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ६४

जगद्गुरु श्री रामानुजाचार्य का प्रभाव 🔹एकबार धनुर्धरदास स्वामीजी बोले “बिभीषण जी स्त्री पुत्र आदि का त्याग करके श्री रामजी की शरणागति किये परंतुु मैंने तो कुछ नही त्याग किया है। मेरी गति कैसे होगी?” 🔹रामानुजाचार्य बोले, “अगर शठकोप स्वामीजी को मुक्ति मिली है, यामुनाचार्य, महापुर्णाचार्य को मुक्ति मिली है तो मुझे मुक्ति मिलेगी। और अगर … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ६३

श्रीरामानुजाचार्य का वैभव (४) 🔹श्रीशेष लोककल्याणार्थ इस भूतलपर यतिराज के रुपमें अवतरित होकर संसारके प्रधान आचार्य हुये। 🔹दयासागर श्रीरामानुजाचार्य के शिष्य संबंध से संसार के समस्त प्राणि कलियुगमें भी निष्पाप होकर मुक्त होजायेंगे। 🔹आचार्यपद के सर्व लक्षण की पूर्ति श्रीरामानुजाचार्य में मिलने से उन्ही के चरणारविंद परम प्राप्य हैं। 🔹श्रीमहापुर्ण इत्यादि स्वामियोंने यतिराज के आचार्य … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय  ६२

श्रीरामानुजाचार्य का वैभव (३) 🔹जैसे भगवान के दशावतारोंमें राम-कृष्ण की प्रधानता है, ॠषिमुनियोंमें व्यासादि मुनि प्रधान हुये, १०८ दिव्य देशोंमें श्रीरंगम, वेंकटाद्रि, काँची प्रमुख माने गये, १० आल्वारोंमें श्रीशठकोपसुरी प्रधान माने जाते हैं उसी प्रकार सभी पूर्वाचार्योंमें यतिराज रामानुजाचार्य प्रमुख आचार्य माने गये हैं। 🔹रामानुजाचार्य ने संसार को अभय प्रदान करनेके लिये भगवान गीताचार्य (श्रीकृष्ण) … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ६१

श्रीरामानुजाचार्य का वैभव (२) 🔹काँचीवासी एक गुंगा बालक अकस्मात् गुम होगया और २ वर्ष पश्चात् प्रगट हुवा। वह अब सुंदर स्पष्ट भाषण करनेवाला होगया था। वह बालक बोला की, “मैं वैकुण्ठ जाकर आया हुँ और रामानुजाचार्य कोई साधारण व्यक्ति ना होकर वैकुण्ठ से अवतरित महापुरुष हैं जिन्होंने लोकरक्षण के लिये इस भूतलपर अवतार लिया है।” … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ६०

  श्री रामानुजाचार्य का वैभव (१) 🔹श्री विष्वक्सेनजी श्री शठकोप स्वामीजी के रूपमें भूतल का भार उतारने के लिये आये थे। 🔹परंतु संसारी जीवोंको देखकर और भगवान के विरह में भगवान का चिन्तन करते हुये एक इमलीवृक्ष के कोटरमें जीवन व्यतीत किये। 🔹जीवोंको कोई उपदेश न दे पाये तब उन्होने विचार किया की श्री आदिशेष … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ५९

अर्चावतोरों द्वारा श्रीयतिन्द्र का वैभव प्रकाशन 🔹रंगनाथ भगवान ने यतिराज को कहा, “आपसे संबंधित जितने भी श्रीवैष्णव हैं तथा भविष्यमें आपकी परंपरामें आनेवाले जो जीव होंगे उनके लिये तथा आपके लिये हमनें अपनी दोनों विभूतियाँ प्रदान कर दी है।” 🔹वेंकटेश भगवान ने भी ऐसा ही कहकर यतिराज का वैभव बढाया। 🔹एक समय वेंकटाद्रि के मार्गपर … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ५८

श्रीकुरेशाचार्य का वैकुण्ठ निवास 🔹श्रीकुरेशाचार्य का वैकुण्ठ जानेका संकल्प सुनकर भी उनकी पत्नी आण्डाल ने विनाविलाप उसे स्वीकार किया। 🔹श्रीकुरेशाचार्य ने अपने दोनों पुत्रोंको बुलाकर कहा की वें गोदारंगेश के शरणमें रहें, श्रीरामानुजाचार्य को रक्षक मानकर अपनी माता की आज्ञापालन करते हुये और श्रीवैष्णवोंकी सेवा करते हुये जीवन व्यापन करें। 🔹ऐसा कहकर उन्होनें अनायासही, सहजता … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ५७

श्रीकुरेशाचार्य की आचार्य निष्ठा 🔹एकबार श्रीकुरेशाचार्यने रंगनाथ भगवान की सन्निधी में आकर भगवान का मंगलाशासन किया। 🔹रंगनाथ भगवानने अति प्रसन्न होकर उनसे मनोवांछित वर मांगनेको कहा। 🔹श्रीकुरेशाचार्य ने कहा, “आपने मुझे पहले से ही सबकुछ दिया है, अब  कुछ भी कामना नहीं है।” 🔹भगवान ने पुन: आग्रह करनेपर श्रीकुरेशाचार्य बोले, “आप मुझे परमपद दे दीजिए।” … Read more