प्रपन्नामृत – अध्याय ३८

प्रपन्नामृत – अध्याय ३८ श्री पराशर भट्टार्य का अवतार 🔸एक दिवस निरन्तर वर्षा के कारण कुरेश स्वामीजी ऊञ्छवृत्ति के लिये घर से बाहर नही निकल सकें। 🔸संग्रहवृत्ति नही होनेके कारण उनके के पास कुछ भी भोजन सामग्री नही थी। अत: वें रात्रिमें भूखे ही शयन किये। 🔸रात्रिमें रंगनाथ भगवान के मंदिरमें भोग लगनेका बाजा सुनकर … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ३७

प्रपन्नामृत – अध्याय ३७ श्रीकुरेश का सम्पत्ति त्याग 🔸काँची के समीप कुरम गाँव के स्वामी कुरेश थे, जो प्रख्यात, धनवान, दानवीर थे। 🔸वें सुर्योदय से रात्रि के दो प्रहर तक निरन्तर अन्नदान देते थे। 🔸विशाल अन्नशाला के भारी किवांड रात्रिमें बंद करते समय मेघ गर्जन के समान ध्वनि उत्पन्न होती थी। 🔸जब कांचीमें वरदवल्लभा अम्माजी … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ३६

प्रपन्नामृत – अध्याय ३६ श्रीरामानुजाचार्य की तीर्थयात्रा 🔹रामानुजाचार्य का दृढव्रत देखकर जगन्नाथ भगवान ने सोचा की अगर सेवा पद्धति बदलदी गयी तो मेरे आश्रित यह अर्चक वृत्तिहीन होकर कष्ट भोगेंगे। 🔹उसी रात्रिमें भगवान ने रामानुजाचार्य को निद्रा में ही जगन्नाथपुरी से दूर कूर्मस्थलमें पहुँचाया। 🔹यतिराज विस्मित हुये परंतु कुर्मनायक भगवान की आज्ञा से वहाँ बिराजे … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ३५

प्रपन्नामृत – अध्याय ३५ पांचरात्रागम अर्चना पद्धति 🔻रामानुजाचार्य शारदा पीठ से लौटकर काशीपुरी में गंगास्नान करके सभी परमतावलम्बी विद्वानोंको परास्त कर श्री जगन्नाथपुरी पधारें। 🔻वहाँपर रामानुज मठ की स्थापना की। 🔻एकदिन श्री जगन्नाथ भगवान के अर्चकोंको बुलाकर कह, “जिस प्रकार पांचरात्र आगम अनुसार श्रीरंगम आदि दिव्यदेशोंमें भगवान की सेवा होती है वैसेही जगन्नाथ भगवान की … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ३४

प्रपन्नामृत – अध्याय ३४ सरस्वती से “श्रीभाष्यकार” पद की प्राप्ति केरलमें सभी जगह परमतावलम्बी पण्डितोंको शास्त्रार्थमें पराजित करते हुये जगह-जगह पर भगवान विष्णु के मन्दिरोंकी तथा रामानुज मठ की स्थापना कराये। यहाँसे उत्तर की ओर द्वारका, मथुरा, अयोध्या, श्री शालिग्राम क्षेत्र (मुक्ति नारायण), बदरिकाश्रम, नैमिषारण्य, पुष्कर, वृन्दावन आदि अनेक तीर्थोंकी यात्रा करत हुये स्वामीजी शारदापीठ … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ३३

प्रपन्नामृत – अध्याय ३३ श्रीकुरंग नगरी पूर्ण को मन्त्र रत्न का उपदेश 🔹अन्यमतोंका खण्डन करनेके पश्चात् विशिष्ठाद्वैत सिद्धान्त का सभी दिशाओंमे प्रचार करने हेतु रामानुजाचार्य कुम्भकोणम् पधारे। 🔹वहाँ अनेक विरोधी मतवादियोंको परास्त करके अपना शिष्य बनाया और कुरुकापुरी में आकर श्री शठकोप स्वामीजी का मंगलाशासन किये। 🔹शठकोप स्वामीजी से आज्ञा लेकर रामानुजाचार्य कुरंग नगरी आकर … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ३२

प्रपन्नामृत – अध्याय ३२ श्रीभाष्य का निर्माण 🔸एक दिन रामानुजाचार्य को श्री यामुनाचार्यजी के वैकुंठगमन के समय अंगुली मोचन के लिये की गयी “श्रीभाष्य” के रचना की प्रतिज्ञा का स्मरण हुवा। 🔸इसके लिये आवश्यक “बोधायन वृत्ति” ग्रंथ प्राप्त करनेके लिये श्रीकुरेश को साथ लेकर काश्मीर के शारदापीठ आये। 🔸 सरस्वतीजी ने उन्हे यह ग्रंथ दिया … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ३१

प्रपन्नामृत – अध्याय ३१ श्री गोविन्दाचार्य का सन्यास ग्रहण 🔸गुरुदेव की सेवा ही भगवत सेवा तुल्य माननेवाले श्री गोविन्दाचार्यजी श्रीशैलपुर्णाचार्य स्वामीजी का स्मरण करके उनके समान ही श्री रामानुजाचार्यमें श्रद्धा रखते हुये अनन्य भावसे उनकी अहर्निश सेवा करने लगे। 🔸एकबार गोविन्दाचार्य की माँ आकर उनसे कहने लगी की अब तुम्हारी पत्नी ॠतुमति हुयी है अत: … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ३०

प्रपन्नामृत – अध्याय ३० यतिराज का श्री शैलपुर्णाचार्य स्वामीजी से रामायण का अर्थ सुनना भाग – १ श्रीरामानुजाचार्य वेंकटाचल को प्रणाम कर चढना प्रारम्भ किये श्रीशैलपुर्णाचार्य स्वामीजी स्वयं अगवानी करके स्वागत के लिये आये रामानुजाचार्य ने पुछा आप स्वयं क्यों आये? किसी बालक को भेजदेते तो श्रीशैलपुर्णाचार्य बोले “मुझे छोड़कर वेंकटाचलमें कोई बालक नही” विविध … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय २९

प्रपन्नामृत – अध्याय २९ श्रीरामानुजाचार्य की वेंकटाचल यात्रा 🔸उधर आचार्य नहीं आयेंगे यह सुनकर रामानुजाचार्य का धनी शिष्य दु:खी हुवा और रामानुजाचार्य के सन्निकट जाकर चरणोंमें गिरकर रोने लगा। 🔸रामानुजाचार्य बोले, ✅पंचसंस्कार, भगवान की सेवा, अर्थपंचक विज्ञान गुरुकृपा से ही प्राप्त होता है, परंतु आत्मोज्जीवन के लिये श्रीवैष्णव अतिथियोंका पूजन आवश्यक है। ✅थके माँदे वैष्णवोंको … Read more