प्रपन्नामृत – अध्याय २८
प्रपन्नामृत – अध्याय २८ भगवत् प्रसाद को ग्रहण करके वैश्य की बुद्धि विमल हो गयी 🔹दरिद्र ब्राह्मण वरदाचार्य जब बाहर से आये और तृप्त गुरुको देखा तो पत्निपर बडे प्रसन्न हुये। 🔹तदनन्तर ब्राह्मणपत्नि ने स्वयं जाकर उस महाजन को भगवत् प्रसाद दिया। 🔹परन्तु भगवत् प्रसाद पाकर उसकी बुद्धि विमल हो गयी। 🔹उसके हृदयमें ज्ञान उत्पन्न … Read more