प्रपन्नामृत – अध्याय २८

प्रपन्नामृत – अध्याय २८ भगवत् प्रसाद को ग्रहण करके वैश्य की बुद्धि विमल हो गयी 🔹दरिद्र ब्राह्मण वरदाचार्य जब बाहर से आये और तृप्त गुरुको देखा तो पत्निपर बडे प्रसन्न हुये। 🔹तदनन्तर ब्राह्मणपत्नि ने स्वयं जाकर उस महाजन को भगवत् प्रसाद दिया। 🔹परन्तु भगवत् प्रसाद पाकर उसकी बुद्धि विमल हो गयी। 🔹उसके हृदयमें ज्ञान उत्पन्न … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय २७

  प्रपन्नामृत – अध्याय २७ यतीन्द्र श्रीरामानुजाचार्य का दरिद्र ब्राह्मण श्री वरदाचार्य के यहाँ आगमन 🔹रामानुजाचार्य की आज्ञा से श्री अनन्ताचार्य वेंकटाचलपर पुष्प-तुलसी का उद्यान लगाकर वेंकटेश भगवान की सेवा करने लगे। 🔹एक बार रामानुजाचार्य चित्रकूृट के समीप सहस्र नामक ग्राम में आरहे थे। 🔹उस ग्राममें उनके यज्ञेश नामक एक धनी तथा वरदाचार्य नामक एक … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय २६

प्रपन्नामृत – अध्याय २६ श्री यज्ञमूर्ति (श्री देवराजमुनि स्वामी) पर श्रीरामानुजाचार्य की कृपा 🔻रामानुजाचार्य ने देवराजमुनि के लिये एक विशाल मठ बनवाया। 🔻रामानुजाचार्य ने समाश्रयण के लिये पधारेे अनेक भक्तगणोंको देवराजमुनि से समाश्रित करवाया। 🔻रामानुजाचार्य ने देवराजमुनि को वरदराज भगवान का नित्य कैंकर्य करनेकी आज्ञा प्रदान की। 🔻देवराजमुनि स्वामीजी ने ज्ञानसारम् एवं प्रमोयसारम् नामक दो … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय २५

प्रपन्नामृत – अध्याय २५ शारदाशोकनाशक श्रीरामानुजाचार्य का यज्ञमूर्ति को पराजित करना 🔺यज्ञमूर्ति नामक मायावादी सन्यासी रामानुजाचार्य को वादविवादमें पराजित करने के लिये आये। 🔺साथमें बहोतसारे ग्रंथ गाडीपर लादकर ले आये। 🔺वादविवाद १८ दिन तक चला। 🔺यज्ञमूर्ति की कुयुक्तियोंके कारण श्रीवैष्णव दर्शन पराजित होजायेगा ऐसा प्रतीत हो रहा था। 🔺रामानुजाचार्य ने वरदराज भगवान को सम्प्रदाय के … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय २४

प्रपन्नामृत – अध्याय २४ यतीन्द्र श्रीरामानुजाचार्यजी के विषप्रदान 🔹रामानुजाचार्य गद्यत्रय तथा भगवदाराधन विधी की रचना कर “श्रीमन्नारायण ही परतत्व हैं” इस बात को सिद्ध करदिये। 🔹रामानुजाचार्य का यह शासन कुछ अर्चकोंको यह बन्धन सा प्रतीत होने लगा। 🔹उनमेसे प्रधान अर्चकने किसी लोभी ब्राह्मण को रामानुजाचार्य को विष देनेको कहा। 🔹लोभी ब्राह्मण की पत्नी ने अपनी … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय २३

प्रपन्नामृत – अध्याय २३ परमपुरुषार्थ के साधनभूत रहस्य 🔸गोष्ठीपुर्ण स्वामीजी के आदेश से रामानुजाचार्य श्री मालाधर स्वामीजी से सहस्रगीति का व्याख्यान नित्यप्रति सुनने लगे। 🔸एकबार रामानुजाचार्य ने एक गाथा के अर्थ पर आपत्ति दर्शायी। 🔸मालाधर स्वामीजी ने तभीसे सहस्रगीति का कालक्षेप बंद कर दिया। 🔸गोष्ठीपुर्ण स्वामीजी ने मालाधर स्वामीजी से कहा “रामानुजाचार्य श्री यामुनाचार्यजी के … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय २२

प्रपन्नामृत – अध्याय २२ यतीन्द्र श्रीरामानुजाचार्य द्वारा श्रीकुरेश तथा श्रीदाशरथि स्वामी को चरम श्लोकोपदेश 🔷श्री कुरेश स्वामीजीके प्रार्थना करनेपर श्रीरामानुजाचार्य ने उन्हे एक मास का उपवास करवाकर फिर चरम श्लोकार्थ प्रदान किया। 🔷श्री दाशरथि स्वामीजीनें भी चरम श्लोकार्थ के लिये प्रार्थना की। 🔷रामानुजाचार्य नें उन्हे गोष्ठीपुर्ण स्वामीजी के पास जानेके लिये कहा। 🔷श्री दाशरथि स्वामीजी … Read more

प्रपन्नामृत -अध्याय २१

प्रपन्नामृत -अध्याय 21 🔸शारदा शोक नाशक श्रीरामानुजाचार्य का गोष्ठीपुर्ण स्वामीजी से मन्त्रार्थ प्राप्त करना🔸 🔺रामानुजाचार्य अपने दो शिष्य कुरेश और दाशरथि के साथ गोष्ठीपुर्ण स्वामीजी से मन्त्रार्थ प्राप्त करने आये। 🔺गोष्ठीपुर्ण स्वामीजी ने कहा, “मैंने आपको अकेले आने के लिये कहा था”। 🔺रामानुजाचार्य बोले, “दाशरथि मेरे त्रिदण्ड तथा कुरेश मेरे यज्ञोपवीत के प्रतीक हैं जो … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय १८

प्रपन्नामृत – अध्याय 18 🔷श्री शैलपूर्णाचार्य स्वामी का गोविन्दाचार्यजी को श्रीवैष्णव बनाना🔷 🔺रामानुजाचार्य के मौसेरे भाई गोविन्दाचार्य माया से प्रभावित होकर कालहस्तिमें शिव आराधना करने लगे थे। 🔺उनके उज्जीवनार्थ रामानुजाचार्य श्रीशैलपुर्णाचार्य को पत्र लिखे। 🔺श्रीशैलपुर्णाचार्य कुछ शिष्योके साथ कालहस्तिपुर के लिये प्रस्थान किये। 🔺जिस जलाशयमें गोविन्दाचार्य प्रतिदिन शिव आराधना के लिये जल लेने आते थे … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय २०

प्रपन्नामृत – अध्याय 20 श्रीरामानुजाचार्य का मन्त्रार्थ प्राप्ति के लिए गोष्ठिपुर जाना 🔹एक दिन श्रीरामानुजाचार्य ने श्री महापुर्णाचार्य स्वामीजी को रहस्यात्मक तत्वोंके उपदेश के लिए प्रार्थना की। 🔹श्रीमहापुर्णाचार्य स्वामीजी ने मूलमन्त्र और द्वयमन्त्र की महिमा वर्णन किया तथा मन्त्रोंके रहस्य अर्थ गोष्ठिपुर में गोष्ठीपुर्ण स्वामीजी से प्राप्त करनेकी आज्ञा प्रदान की। 🔹रामानुजाचार्य ने श्री गोष्ठीपुर्ण … Read more