प्रपन्नामृत – अध्याय १९

प्रपन्नामृत – अध्याय 19 गोविन्ददास का श्रीशैलपुर्णाचार्य स्वामी से समाश्रित होना 🔹श्रीशैलपूर्णाचार्य स्वामीजी कालहस्तिपुर आकर सुवर्ण मुखरी जलाशय के निकट सहस्रगीति का कालक्षेप सुनाने लगे। 🔹वहीं शिवजी की सेवा के लिये पुष्प चुनने गोविन्दाचार्य आये और १४ वें गाथा में सुनें, “⚡जिन भगवान विष्णु के नाभिकमलसे ब्रह्मा उत्पन्न होते हैं,⚡जो चराचर समस्त जगत् के एकमात्र … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय १७

प्रपन्नामृत –  अध्याय 17 भगवान श्री रंगनाथ द्वारा यतिराज को विभूतिद्वय प्रदान 🔹यतिराज श्रीरंगम पहुंचे तो श्री रंगनाथ भगवानने विविध वाद्यघोषों के तथा वेदपाठी ब्राह्मणों के साथ उनका सम्मान करनेका आदेश श्री महापुर्णाचार्य को किये। 🔹श्री रंगनाथ भगवान भी स्वागत के लिये आगे आये। 🔹भगवान बोले, “नित्य विभूति और लीला विभूति दोनोंकी अबतक मैंने रक्षा … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय १६

प्रपन्नामृत –  अध्याय 16 यतिराज का श्रीरंगम् प्रयाण 🔸यतिराज रामानुजाचार्य काञ्चीपुरी के भक्तोंके दोषोंको दूर करके उनके बीच वैकुण्ठनाथ भगवान की तरह सुशोभित हुये। 🔸यतिराज के मामा श्रीशैलपुर्णाचार्य स्वामीजी रंगनाथ भगवान से प्रार्थना किये की वें रामानुजाचार्य को श्रीरंगम् बुला लें। 🔸रंगनाथ भगवान ने वरदराज भगवान की सेवामें पत्र भेजकर रामानुजाचार्य को भेजनेके लिये निवेदन … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय १५

प्रपन्नामृत -अध्याय 15 ♦श्री यादवप्रकाशाचार्य की शरणागति♦ 🔹श्री कुरेश स्वामीजी से पराजित होकर यादवप्रकाश अपने मठमें आये। 🔹रात को स्वप्नमें देवराज भगवान ने यादवप्रकाश से कहा, “तुम्हारी माता की वाणी सत्य है, यतिराज की शरणागति के बिना तुम्हारी मुक्ति न होगी।” 🔹अभी भी संशयग्रस्त यादवप्रकाश कुछ निर्णय नही कर पाये तो माताजी ने उन्हें यतिराज … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय १४

 प्रपन्नामृत –  अध्याय 14 विशिष्टाद्वैत दर्शन के आधारभूत तत्वों में प्रमाण  – भाग १/३ 🔺काञ्चीपुरी के पुर्व भागमें भरतजी के अंश से अवतीर्ण दाशरथि स्वामीजी का प्रादुर्भाव हुआ। 🔺अपने मामाजी रामानुजाचार्य के सन्यास का समाचार सुनकर वें रामानुजाचार्य से समाश्रित होगये। 🔺तदनन्तर श्री कुरेश स्वामीजी भी श्री रामानुजाचार्य द्वारा भगवत् शरणारगति प्राप्त किये। 🔺एक समय … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय १३

प्रपन्नामृत –  अध्याय 13 सन्यस्त श्रीरामानुजाचार्य का श्रीवरदराज भगवान द्वारा सम्मान 🔸 अनन्त सरोवर के तट पर गुरुदेव यामुनाचार्यजी का ध्यान करते हुए रामानुजाचार्य सन्यास ग्रहण किये। 🔸 देवताओंने पुष्प वर्षा और दुन्दुभिघोष की। 🔸 निराश कलि पर्वत-कन्दराओंमें अपना स्थान खोजने लगा कि कहीं पाप का विनाश ना हो जाय। 🔸 वरदराज भगवान की आज्ञा … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय १२

प्रपन्नामृत –  अध्याय 12 श्रीरामानुजाचार्य द्वारा पत्नी का परित्याग 🔸महापुर्ण स्वामीजी सपत्निक श्री रामानुजाचार्य के यहाँ रहते थे। 🔸 एक बार रामानुजाचार्य की पत्नी रक्षकाम्बा जल लाने कुँए पर गयी। उसी जगह श्रीमहापुर्णाचार्य की पत्नी भी जल लाने कुँए पर आयी थी। 🔸 अपना अपना घडा कुँए से निकालते समय महापुर्ण स्वामीजी के पत्नी के … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ११

प्रपन्नामृत –  अध्याय 11 श्री महापुर्णाचार्य स्वामीजीसे श्रीरामानुजाचार्य का पञ्चसंस्कार ग्रहण 🔹 श्री यामुनाचार्यजी के वैकुण्ठगमन के बाद श्रीरंगम के सभी वैष्णवोंने निर्णय किया की वैष्णवरक्षक श्रीरामानुजाचार्य को महापुर्ण स्वामीजी द्वारा पञ्चसंस्कार संस्कृत करके और आल्वारोंके ग्रंथोंका अध्ययन कराके श्रीरंगम लाया जाय। 🔹 महापुर्ण स्वामीजी रामानुजाचार्य को लेने के लिये काञ्ची के लिये प्रयाण किये। … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय १०

भगवान वरजराज द्वारा छ: वाक्य प्रदान 🔺 एकबार रामानुजाचार्य काञ्चीपूर्ण स्वामीजी के तरीप्रसाद की अभिलाषा से उन्हे अपने यहाँ प्रसाद पाने के लिये आग्रह किये। काञ्चीपूर्ण स्वामीजी ने निमन्त्रण स्वीकार किया। 🔺 रामानुजाचार्य घरपर नही थे तभी काञ्चीपूर्ण स्वामीजी आये और रामानुजाचार्य की पत्नी श्रीमति रक्षकाम्बा को विनन्ती करके जल्दी प्रसाद पाकर चले गये। 🔺 … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ९

श्री यामुनाचार्यजी का वैकुण्ठगमन यामुनाचार्यजी ने जब सुना की रामानुजाचार्य ने यादवप्रकाश के यहाँ का अध्ययन छोड दिया है तो उन्होने अपने शिष्य महापुर्णाचार्य को काञ्ची जाकर वरदराज भगवान को आलवन्दार स्तोत्र का पाठ सुनाने की आज्ञा की। महापुर्ण स्वामीजी आचार्य आज्ञानुसार भगवान को पाठ सुना रहे थे तो जलसेवा करते हुये रामानुजाचार्य को यह … Read more