आचार्य हृदयम् – १७

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचलमहामुनये नमः

श्रृंखला

<< आचार्य हृदयम् – १६

अवतारिका ( परिचय)

इस प्रकार, पिछली चूर्णिका में यह बताया गया कि भगवान ने कृपापूर्वक संसारी चेतनों (बद्ध आत्माओं) का उद्धार करने के लिए शास्त्र और तिरुमन्त्र का प्रकटीकरण किया, जो कि उन शास्त्रों का सार है। “उन्होंने उनको कैसे प्रकट किया? किन दर्शकों को लक्ष्य बनाया?” इन प्रश्नों के उत्तरों को यहाँ समझाया गया है।

चूर्णिका १७-

मुनिवरै इडुक्कियुम् मुन्नीर् वण्णनायुम् वॆळियिट्ट शास्त्र तात्पर्यङ्गळुक्कु विशिष्ट निष्कृष्ट वेशङ्गळ् विषयम्।

सरल व्याख्या 

ऋषियों के द्वारा जो शास्त्रों को प्रकट किया है उनका शरीर के साथ तथा भगवान के द्वारा शास्त्रों के सार के प्रकटीकरण के लक्ष्य दर्शक क्रमशः आत्मा सहित शरीर की और शुद्ध आत्मा की अवस्थाएँ हैं।

व्याख्यान (टीका)

इसका अर्थ है- व्यास ऋषि आदि जो निरन्तर ध्यान मग्न हैं जैसे कि तिरुवाय्मोऴि १०.७.७ में वर्णित है, इरुळ्गळ् कडियुम् मुनिवर्” (महान ऋषि जो पुराणादि के रूप में निर्देशों के माध्यम से अज्ञान रूपी अंधकार को समाप्त कर सकते हैं), उनको स्वयं भगवान कहकर पुकार सकते हैं जैसे कि श्रीविष्णु पुराण ३.४.४ में कहा गया है,

“कृष्ण द्वैपायनं व्यासं विद्धि नारायणं प्रियम्।
कोह्यन्य: पुण्डरीकाक्षान् महाभारत कृत्भवेत्।।”

(कृष्ण द्वैपायन को स्वयं नारायण ही मानें, कमलनयन भगवान के अतिरिक्त और किसमें महाभारत को लिखने का सामर्थ्य है!), भगवान उनके अन्तर्यामी होने के कारण; स्वयं भगवान द्वारा इन शास्त्रों का प्रकटीकरण करने के लक्ष्य दर्शक हैं शरीर सहित आत्माओं की स्थितियाँ।

जैसे पेरिय तिरुमोऴि १.४.१०- में वर्णित है, वदरियाच्चिरामत्तुळ्ळानै करुङ्गडल् मुन्नीर् वण्णनै…” (सर्वेश्वर जो समुद्र के समान दिव्य श्याम वर्ण वाले जिसमें तीन प्रकार के जल है, श्री बद्रिकाश्रम में शाश्वत रूप से निवास करते हैं…), तिरुमन्त्र जो कि शास्त्रों का सार है जिसका प्रकटीकरण स्वयं भगवान ने श्री बद्रिकाश्रम में किया उसके लक्ष्य दर्शक विशिष्ट रूप से (शरीर को ध्यान में न रखकर) आत्माओं की अवस्था है।

इसके सहित यह समझाया गया है कि शास्त्र शरीर पर केंद्रित हैं और शास्त्र का सार आत्मा के वास्तविक स्वरूप पर केंद्रित है।

अडियेन् अमिता रामानुजदासी

आधार – https://granthams.koyil.org/2024/03/11/acharya-hrudhayam-17-english/

प्रमेय (लक्ष्य) – https://koyil.org
प्रमाण (शास्त्र) – https://granthams.koyil.org
प्रमाता (आचार्य) – https://acharyas.koyil.org
श्रीवैष्णव शिक्षा/बालकों का पोर्टल – https://pillai.koyil.org

Leave a Comment