श्रीवचनभूषण – सूत्रं १३१
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब उनसे पूछा गया कि “शास्त्र ने पहले इनका आदेश क्यों देकर बाद में इनका निषेध क्यों किया?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी दयापूर्वक समझाते हैं। सूत्रं – १३१ अत्तै शास्त्र विश्वासत्तुक्काग विधित्तदु; इत्तै स्वरूप विश्वासत्तुक्काग विधित्तदु। सरल अनुवाद श्येन … Read more