वरदराज भगवान् आविर्भाव कि कहानी १२ – २
श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः वरदराज भगवान् आविर्भाव कि कहानी << भाग १२ – १ स्वयं को वेगवती में परिवर्तन करके, क्रोधित सरस्वती कोप में ब्रह्मा के वेल्वी को नाश करने कि इच्छा से तीव्र गति से आ रही थी । नदी सुक्तिका, कनका, सुप्रा, कम्पा, पेया, मंजुला और चंदवेगा (चंडवेगा) (वेगावती … Read more