यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग २
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग १ एक दिन श्रीकलिवैरिदास स्वामीजी अपने दिन नित्य कालक्षेप करने के पश्चात अकेले विश्राम कर रहे थे जब अम्मी, उनके एक शिष्य वडक्कु तिरुवीदिप्पिळ्ळै (श्रीकृष्णपादर् स्वामी) की माताजी दण्डवत प्रणाम कर उनके बगल में खड़ी हो गयी। उन्होंने बड़ी करुणा से … Read more