यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ४६
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ४५ अण्णन् श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के शरण होते हैं तत्पश्चात जैसे इस श्लोक में कहा गया हैं रामानुजपदाम्बोज सौगन्द्य निदयोपियेअसाधारण मौनत्यमवधूय निजम्दिया।उत्तेजयन्तः स्वात्मानं तत्तेजस्सम्पदा सदास्वेषामतिशयं मत्वा तत्वेन शरणं ययुः॥ (जिन्होंने श्रीरामानुज स्वामीजी के दिव्य चरणों से सुगन्ध का धन प्राप्त किया हो, महानता … Read more