श्रीवचन भूषण – सूत्रं १९४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम:

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अवतारिका

श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी ने दयापूर्वक भागवत-अपचार के अनेक रूपों पर प्रकाश डाला है।

सूत्रं – १९४

भागवत अपचारन्दान्‌ अनेक विधम्‌।

सरल अनुवाद

भागवतों के प्रति की गई त्रुटियाँ या अपचार अनेक प्रकार के होते हैं।

व्याख्या

भागवत अपचारन्दान्‌

अनेक विधम्‌

भागवतों के प्रति कई तरह की त्रुटियाँ या अपराध किए जाते हैं, जैसे जन्म निरूपण (जन्म के आधार पर आंकना), ज्ञान निरूपण (ज्ञान के आधार पर आंकना), वृत्त निरूपण (आचरण के आधार पर आंकना), आकार निरूपण (शारीरिक बनावट के आधार पर आंकना), बंधु निरूपण (बंधु-संबंधियों के आधार पर आंकना), वास निरूपण (निवास स्थान के आधार पर आंकना) आदि।

अडियेन् केशव रामानुज दास

आधार – https://granthams.koyil.org/2021/08/17/srivachana-bhushanam-suthram-194-english/

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