प्रपन्नामृत – अध्याय ५९
अर्चावतोरों द्वारा श्रीयतिन्द्र का वैभव प्रकाशन 🔹रंगनाथ भगवान ने यतिराज को कहा, “आपसे संबंधित जितने भी श्रीवैष्णव हैं तथा भविष्यमें आपकी परंपरामें आनेवाले जो जीव होंगे उनके लिये तथा आपके लिये हमनें अपनी दोनों विभूतियाँ प्रदान कर दी है।” 🔹वेंकटेश भगवान ने भी ऐसा ही कहकर यतिराज का वैभव बढाया। 🔹एक समय वेंकटाद्रि के मार्गपर … Read more