प्रपन्नामृत – अध्याय ३५

प्रपन्नामृत – अध्याय ३५ पांचरात्रागम अर्चना पद्धति 🔻रामानुजाचार्य शारदा पीठ से लौटकर काशीपुरी में गंगास्नान करके सभी परमतावलम्बी विद्वानोंको परास्त कर श्री जगन्नाथपुरी पधारें। 🔻वहाँपर रामानुज मठ की स्थापना की। 🔻एकदिन श्री जगन्नाथ भगवान के अर्चकोंको बुलाकर कह, “जिस प्रकार पांचरात्र आगम अनुसार श्रीरंगम आदि दिव्यदेशोंमें भगवान की सेवा होती है वैसेही जगन्नाथ भगवान की … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ३४

प्रपन्नामृत – अध्याय ३४ सरस्वती से “श्रीभाष्यकार” पद की प्राप्ति केरलमें सभी जगह परमतावलम्बी पण्डितोंको शास्त्रार्थमें पराजित करते हुये जगह-जगह पर भगवान विष्णु के मन्दिरोंकी तथा रामानुज मठ की स्थापना कराये। यहाँसे उत्तर की ओर द्वारका, मथुरा, अयोध्या, श्री शालिग्राम क्षेत्र (मुक्ति नारायण), बदरिकाश्रम, नैमिषारण्य, पुष्कर, वृन्दावन आदि अनेक तीर्थोंकी यात्रा करत हुये स्वामीजी शारदापीठ … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ३३

प्रपन्नामृत – अध्याय ३३ श्रीकुरंग नगरी पूर्ण को मन्त्र रत्न का उपदेश 🔹अन्यमतोंका खण्डन करनेके पश्चात् विशिष्ठाद्वैत सिद्धान्त का सभी दिशाओंमे प्रचार करने हेतु रामानुजाचार्य कुम्भकोणम् पधारे। 🔹वहाँ अनेक विरोधी मतवादियोंको परास्त करके अपना शिष्य बनाया और कुरुकापुरी में आकर श्री शठकोप स्वामीजी का मंगलाशासन किये। 🔹शठकोप स्वामीजी से आज्ञा लेकर रामानुजाचार्य कुरंग नगरी आकर … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ३२

प्रपन्नामृत – अध्याय ३२ श्रीभाष्य का निर्माण 🔸एक दिन रामानुजाचार्य को श्री यामुनाचार्यजी के वैकुंठगमन के समय अंगुली मोचन के लिये की गयी “श्रीभाष्य” के रचना की प्रतिज्ञा का स्मरण हुवा। 🔸इसके लिये आवश्यक “बोधायन वृत्ति” ग्रंथ प्राप्त करनेके लिये श्रीकुरेश को साथ लेकर काश्मीर के शारदापीठ आये। 🔸 सरस्वतीजी ने उन्हे यह ग्रंथ दिया … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ३१

प्रपन्नामृत – अध्याय ३१ श्री गोविन्दाचार्य का सन्यास ग्रहण 🔸गुरुदेव की सेवा ही भगवत सेवा तुल्य माननेवाले श्री गोविन्दाचार्यजी श्रीशैलपुर्णाचार्य स्वामीजी का स्मरण करके उनके समान ही श्री रामानुजाचार्यमें श्रद्धा रखते हुये अनन्य भावसे उनकी अहर्निश सेवा करने लगे। 🔸एकबार गोविन्दाचार्य की माँ आकर उनसे कहने लगी की अब तुम्हारी पत्नी ॠतुमति हुयी है अत: … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ३०

प्रपन्नामृत – अध्याय ३० यतिराज का श्री शैलपुर्णाचार्य स्वामीजी से रामायण का अर्थ सुनना भाग – १ श्रीरामानुजाचार्य वेंकटाचल को प्रणाम कर चढना प्रारम्भ किये श्रीशैलपुर्णाचार्य स्वामीजी स्वयं अगवानी करके स्वागत के लिये आये रामानुजाचार्य ने पुछा आप स्वयं क्यों आये? किसी बालक को भेजदेते तो श्रीशैलपुर्णाचार्य बोले “मुझे छोड़कर वेंकटाचलमें कोई बालक नही” विविध … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय २९

प्रपन्नामृत – अध्याय २९ श्रीरामानुजाचार्य की वेंकटाचल यात्रा 🔸उधर आचार्य नहीं आयेंगे यह सुनकर रामानुजाचार्य का धनी शिष्य दु:खी हुवा और रामानुजाचार्य के सन्निकट जाकर चरणोंमें गिरकर रोने लगा। 🔸रामानुजाचार्य बोले, ✅पंचसंस्कार, भगवान की सेवा, अर्थपंचक विज्ञान गुरुकृपा से ही प्राप्त होता है, परंतु आत्मोज्जीवन के लिये श्रीवैष्णव अतिथियोंका पूजन आवश्यक है। ✅थके माँदे वैष्णवोंको … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय २८

प्रपन्नामृत – अध्याय २८ भगवत् प्रसाद को ग्रहण करके वैश्य की बुद्धि विमल हो गयी 🔹दरिद्र ब्राह्मण वरदाचार्य जब बाहर से आये और तृप्त गुरुको देखा तो पत्निपर बडे प्रसन्न हुये। 🔹तदनन्तर ब्राह्मणपत्नि ने स्वयं जाकर उस महाजन को भगवत् प्रसाद दिया। 🔹परन्तु भगवत् प्रसाद पाकर उसकी बुद्धि विमल हो गयी। 🔹उसके हृदयमें ज्ञान उत्पन्न … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय २७

  प्रपन्नामृत – अध्याय २७ यतीन्द्र श्रीरामानुजाचार्य का दरिद्र ब्राह्मण श्री वरदाचार्य के यहाँ आगमन 🔹रामानुजाचार्य की आज्ञा से श्री अनन्ताचार्य वेंकटाचलपर पुष्प-तुलसी का उद्यान लगाकर वेंकटेश भगवान की सेवा करने लगे। 🔹एक बार रामानुजाचार्य चित्रकूृट के समीप सहस्र नामक ग्राम में आरहे थे। 🔹उस ग्राममें उनके यज्ञेश नामक एक धनी तथा वरदाचार्य नामक एक … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय २६

प्रपन्नामृत – अध्याय २६ श्री यज्ञमूर्ति (श्री देवराजमुनि स्वामी) पर श्रीरामानुजाचार्य की कृपा 🔻रामानुजाचार्य ने देवराजमुनि के लिये एक विशाल मठ बनवाया। 🔻रामानुजाचार्य ने समाश्रयण के लिये पधारेे अनेक भक्तगणोंको देवराजमुनि से समाश्रित करवाया। 🔻रामानुजाचार्य ने देवराजमुनि को वरदराज भगवान का नित्य कैंकर्य करनेकी आज्ञा प्रदान की। 🔻देवराजमुनि स्वामीजी ने ज्ञानसारम् एवं प्रमोयसारम् नामक दो … Read more