श्रीवचन भूषण – सूत्रं २०

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी शृंखला << पूर्व अवतारिका यहाँ तक कि ये (पिछले सूत्र में उल्लिखित) भी प्राथमिक दोष नहीं हैं; प्राथमिक दोष एक अलग है। सूत्रं – २० द्रौपदी परिभवम् कण्डिरुन्ददु कृष्णाभिप्रायत्ताले प्रधान दोषम् सरल अनुवाद भगवान श्रीकृष्ण की राय अनुसार द्रौपदी के अपमान के समय … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १९

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी शृंखला << पूर्व अवतारिका यद्यपि अर्जुन का दोष राक्षसियों जितना लोकप्रिय नहीं है, और वह अच्छे गुणों वाला माना जाता है, फिर भी उसमें दोष क्या है?  श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी यह प्रश्न उठाते हैं और उनका दोष दिखा रहे हैं। सूत्रं – … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी शृंखला पूर्व अवतारिका अब, इस प्रश्न के लिए “क्या ऐसा कोई उदाहरण है जहां पिराट्टी और पेरुमाल ने चेतन को उनके दोष और गुणहानी के साथ प्रसाद के रूप में स्वीकार किया?”, श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी का मानना ​​है कि “राक्षसियों और अर्जुन … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १७

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी शृंखला पूर्व​ अवतारिका यह समझाने के पश्चात कि यदि पिराट्टि  और पेरुमाळ् निर्णय लेते हैं कि “जब तक दोष और गुण समाप्त नहीं हो जाते, हम चेतनों को स्वीकार नहीं करेंगे”, वे दोष और गुण प्राप्त कर लेंगे, अब श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १६

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी शृंखला पूर्व​ अवतारिका पुरुषकार (पिराट्टि) और उपाय (भगवान) दोनों चेतन को उसके दोष और गुणहानी (अच्छे गुणों की कमी) दूर होने से पहले ही क्यों स्वीकार कर रहे हैं? क्या होगा यदि वे चेतना के उन पहलुओं से मुक्त होने की प्रतीक्षा … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी शृंखला पूर्व अवतारिका कृपा के विषय पर कहने के पश्चात श्रीरामायण की महानता कैसे प्रगट होती हैं यह समझाने के पश्चात श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी दयापूर्वक बताते हैं कि महाभारत में उपाय की महानता कैसे प्रगट होती हैं।  सूत्रं – १४ अऱियाद​ अर्थङ्गळै … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी शृंखला पूर्व​ अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपाकर अम्माजी की प्रतिक्रीया समझाते हैं जब वें उनकी परामर्च पर नहीं बदलते हैं।  सूत्रं – १३ उपदेशत्ताले मीळाद​ पोदु चेतननै अरुळाले तिरुत्तुम, ईश्वरनै अऴाले  तिरुत्तुम।  सरल अनुवाद जब वें अम्माजी के परामर्श को सुनकर नहीं … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी शृंखला पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपाकर समझाते हैं कि आपकी सलाह दोनों ईश्वर और चेतन को लाभ पहूँचायेगी।  सूत्रं – १२ उपदेशत्ताले  इरुवरुडैयवुम्  कर्म पारतंत्रयम् कुलैयुम्।  सरल अनुवाद उनकी सलाह से, ईश्वर और चेतन दोनों की कर्म पर निर्भरता नष्ट हो … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं ११

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी शृंखला पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळैलोकाचार्य स्वामीजी कृपाकर इस प्रश्न का उत्तर दे रहे हैं कि वह ईश्वर और चेतना दोनों को कैसे सुधारती हैं?  सूत्रं – ११ इरुवरैयुम् तिरुत्तुवदु उपदेशत्ताले सरल अनुवाद वह अपनी सलाह से दोनों को सुधारती हैं।  व्याख्यान इरुवरैयुम् … … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १०

पूरी शृंखला पूर्व​ श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपाकर यह समझाते हैं कि कैसे अम्माजी मिलन और अलगाव में पुरुषकार कैसे करती हैं।  सूत्रं – १० सम्श्लेष दशयिल् ईश्वरनैत् तिरुत्तुम्; विश्लेष दशयिल् चेतननैत् तिरुत्तुम् सरल अनुवाद संघ में ईश्वर को सुधारेगी और अलगाव में … Read more