यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग १३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग १२ श्रीवरवरमुनि स्वामीजी कहे कि श्रीवचन भूषण दिव्य शास्त्र बड़ी दया से श्रीरन्ङ्गनाथ् भगवान कि आज्ञा से रचि गई हैं इसलिये उपर कि घटना किसी के भी मन में श्ंखा उत्पन्न करती हैं। इससे तो बेहतर होगा कि शिक्षित जनों से अपनी … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग १२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग ११ श्रीपिळ्ळैलोकाचार्य स्वामीजी का वैभव  श्रीपिळ्ळैलोकाचार्य स्वामीजी के ऐसे वैभव थे कि उनको श्रीशठकोप स्वामीजी का अपरावतार माना गया हैं। उनके अनुज श्रीअऴगियमणवाळपेरुमळ् नायनार् उनके कृपा के नीचे बड़े हुए। दोनों भाई साथ में बड़े हुए। वें दोनों साथ बड़े हुए … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग ११

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग १० श्रीवडक्कुत्तिरुवीदिप्पिळ्ळै  (श्रीकृष्णपाद स्वामीजी) का वैभव  श्रीकलिवैरिदास स्वामीजी के पश्चात जब श्रीकृष्णपाद स्वामीजी श्रीरामानुज दर्शन के अगले आचार्य हुए तब उनके शिष्यों ने उनसे पूछा “आत्मा का मूल स्वभाव क्या हैं?”। उन्होंने यह कहते हुए उत्तर दिया कि “यह कहा जाता … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग १०

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग ९ श्री ईयुण्णि माधव पेरुमाळ् स्वामीजी का वैभव  श्रीकलिवैरिदास स्वामीजी से ईडु मुप्पत्ताऱायिरम् (श्रीकृष्णपाद स्वामीजी द्वारा लिखा हुआ व्याख्या जो श्रीकलिवैरिदास स्वामीजी के कालक्षेप पर आधारित हैं) प्राप्त करने के पश्चात श्री ईयुण्णि  माधवप्पेरुमाळ् स्वामीजी ने इस व्याख्या को अपने पुत्र … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग ९

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग ८ श्रीपेरियवाच्चान पिळ्ळै स्वामीजी का वैभव  श्रीकलिवैरिदास स्वामीजी तिरुनाडु (श्रीवैकुंठ) को प्राप्त करने के पश्चात श्रीपेरियवाच्चान पिळ्ळै स्वामीजी ने इस सम्प्रदाय (श्रीवैष्णव तत्त्व) कि बाग डोर को अपने हाथ में लियें और श्रीकलिवैरिदास स्वामीजी के सभी शिष्यों को एकत्रित किया। श्रीनडुविल् … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग ८

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग ७ एक समय श्रीकलिवैरिदास स्वामीजी और उनके शिष्य श्रीरङ्गम् में श्रीवैष्णव संप्रदाय को देख्बाल कर्ते हुये  निवास कर रहे थे, वहाँ एक स्त्री थी जो स्वामीजी कि शिष्या भि थी,और स्वामीजी के तिरुमळिगै के सटे हुए तिरुमळिगै में रहती थी। एक … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग ७

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग ६ श्रीकलिवैरिदास स्वामीजी एक बार एक व्यक्ति जिसका नाम पेरिय कोयिल् वळ्ळलार् हैं उनसे पूछा की श्रीपरकाल स्वामीजी द्वारा रचित तिरुमोऴि के पहिले पद्य का अर्थ बताये, १-१-९ पाशुर कुलं तरुं (यह पाशुर श्रीमन्नारायण के दिव्य नाम संकीर्तन करने के लाभ … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग ६

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग ५ श्रीकलिवैरिदास स्वामीजी की दो पत्नीयाँ थी। पहिली पत्नी एक दिन प्रसाद बनाती थी और दूसरे दिन दूसरी पत्नी। जब ऐसे हीं प्रतिदिन चल रहा था तब श्रीकलिवैरिदास स्वामीजी ने अपनी पहिली पत्नी को बुलाकर कहा “आप मेरे विषय में अपने … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग ५

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग ४ श्रीकलिवैरिदास स्वामीजी ओन्बदिनायिरप्पडि को विशिष्ट अर्थो के साथ उनके शिष्य श्रीपेरियवाच्चान पिळ्ळै को सिखाना प्रारम्भ किया। श्रीपेरियवाच्चान पिळ्ळै ने प्रतिदिन इन अर्थों का पट्टोंलै (ताड़ के पत्ते पर पहिली प्रति) बनाना प्रारम्भ किया। कालक्षेप के अन्त में उन सभी हस्तलिपि … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग ४

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग ३ लगभग उस समय एक व्यक्ति  जिन्का नाम देवराज (नम्बूर वरदराजर) था,वह पदुगै चक्रवर्ती मन्दिर के समीप रहता था। उन्हे सभी सामान्य और प्रतिष्ठित जन पसंद करते थे।  वह बड़ा दयालु और सत्व गुणों का प्रदर्शन करता था। श्रीवेदांती स्वामीजी को … Read more