वेदार्थ संग्रह: 5

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः वेदार्थ संग्रह: भाग ४ वेदों के महत्त्व की समझ प्रतिद्वंद्वी व्याख्याएं शुरुआती अंशों के जरिए वेदांत के महत्त्व को समझाते हुए, स्वामी रामानुजा ने शेष पाठ को दो खंडों में विभाजित किया हैः (i) प्रतिद्वंद्वी व्याख्याओं की आलोचना, और (ii) अपनी स्थिति का स्पष्टीकरण ६ से ८ के … Read more

वेदार्थ संग्रह: 4

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः वेदार्थ संग्रह भाग ३ वेदों के महत्त्व की समझ व्यक्तिगत आत्मा का और भगवान का वास्तविक स्वभाव। वेदों का सार बताते हुए, भगवद रामानुज ने अगले दो मार्गों में व्यक्तिगत आत्मा और ईश्वर के सच्चे स्वभावको समझाया है। अंश ४ 1. व्यक्तिगत आत्मा के सच्चे स्वभावमें बहुरूप … Read more

वेदार्थ संग्रह: 3

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः वेदार्थ संग्रह भाग २ वेदों के महत्त्व की समझ प्रवचन यहाँ से शुरू होता है। हम टिप्पणी के साथ प्रत्येक मार्ग का सार विचार करेंगे। अपने प्रवचन के प्रारंभ में, स्वामी रामानुजा ने संक्षेप में वेदों का अनिवार्य अर्थ बताया है। अंश ३ का सार : … Read more

वेदार्थ संग्रह: 2

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः वेदार्थ संग्रह: <<भाग १ वेदों के महत्त्व की समझ प्रारंभिक छंद [2] परम-ब्रहमैवज्नम् ब्रमापरिगतम समसरति तत परोपद्ययालिदम विवसम-असुभस्यपदमिति। स्र्ति-न्ययापितम जगति वित्तम मोहनमिदम तमो येनपसतम स हि विजयते यामुनामुनिहः॥ यह छंद स्वमी यामुनाचार्य कि प्रश्न्सा में कहा गया है। स्वमी यामुनाचार्य का महत्व उन्के द्वारा निभाये गये पात्र, … Read more

वेदार्थ संग्रह: 1

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः वेदार्थ संग्रह मङ्गलाचरण श्लोक यह परम्परागत अनुशीलन है आचार्यो को अपने शिक्षा या ग्रन्थ रचना के प्रारम्भ करने से पूर्व भगवान् एवं स्वाचार्य का मङ्गलाचरण श्लोक प्रस्तुत करें । इसी प्रकारेण प्रपन्न प्रिय भगवद् रामानुजाचार्य स्वामी अपने पहले ग्रन्थ में ऐसे दो मङ्गलाचरण श्लोक प्रस्तुत … Read more

विरोधी परिहारंगल (बाधाओं का निष्कासन) – २६

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रीवादिभीकरमहागुरुवे नमः श्रीवैष्णवों को अपने दैनिक जीवन में कैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है इसका उपदेश श्रीरामानुज स्वामीजी ने वंगी पुरत्तु नम्बी को दिया। वंगी पुरत्तु नम्बी ने उसपर व्याख्या करके “विरोधी परिहारंगल (बाधाओं को हटाना)” नामक ग्रन्थ के रूप में प्रस्तुत किया। … Read more

द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् 28

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् << भाग 27 सन्तमिगु तमिळ् मरैयोन् , वेदान्तगुरु (वेदान्ताचार्य) (द्रमिडोपनिषद् प्रभावसर्वस्व का अन्तिम अध्याय) स्वामी देशिक (वेदान्ताचार्य) जी स्पष्टरूप से कहते है कि संस्कृत वेद को समझने के लिये सर्वप्रथम अरुलिच्चेयल (दिव्यप्रबन्ध) का अध्ययन करना अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है | दिव्य प्रबन्ध केवल … Read more

द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् 27

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् << भाग 26 श्री पराशर भट्टर और आळ्वार श्रीवैष्णव सम्प्रदाय की परम्परा मे, स्वामी श्री पराशर भट्टर, एक प्रसिद्ध एवं निपुण व्यक्तित्व है | उनका सम्प्रदाय एवं परम्परा मे ज्ञान अतुलनीय है और इस विषय मे आपकी प्रवीणता तो स्वामी रामानुजाचार्य से … Read more

द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् 26

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् << भाग 25 श्रीशठकोप स्वामी एवं कुरेश स्वामी (आळ्वार एवं आळ्वान) श्रीकूरेश स्वामी द्वारा विरचित, अतिमानुष स्तव का तीसरा श्लोक भी आप श्री का आळ्वार के प्रति अत्यन्त प्रेम भावना को प्रकाशित करता है :: श्रीमत् परान्कुश मुनीन्द्र मनोविलासात् तज्जानुरागरसमज्जनं अञ्जसाप्य | … Read more

द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् 25

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् << भाग 24 परान्कुश पयोधि ऐसे विभिन्न लवलीन घटनाएँ है जिनसे भगवद् पाद श्रीरामानुजाचार्य के विभिन्न ग्रन्थों मे शठकोप स्वामीजी के दिव्य शब्दों के गूढ़ प्रभाव को अनुभव कर सकते है | हमने यह भी देखा कि किस तरह से भगवद्रामानुजाचार्य, शठकोप … Read more