वेदार्थ संग्रह: 6
श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः वेदार्थ संग्रह: भाग ५ वेदों के महत्त्व की समझ अद्वैत की आलोचना यहां से अद्वैत की आलोचना शुरू होती है, इसके बाद दो भेदाभेद विद्यालयों की आलोचनाएं होती हैं। अंश ९ पहले व्याख्याओं में प्रस्तुत (अर्थात् अद्वैत), वेदों के चौकस विद्वान कठिन समस्याएं की पहचान की हैं। “तत्तवमसि” … Read more