द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् 4

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् << भाग 3 श्री यामुनाचार्य स्वामीजी और श्री आल्वार श्रेष्ठ सन्यासी श्री यामुनाचार्य स्वामीजी श्री नाथमुनी स्वामीजी (जिन्होने दिव्य प्रबंधोंकों का पुनरुज्जीवन किया) के पौत्र हैं। श्री यामुनाचार्य स्वामीजी आलवंदार, यमुनै तुरैवर, और यामुन मुनी नाम से भी जाने जाते हैं। वें … Read more

द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् 3

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् << भाग 2 श्री तैत्तरीय उपनिषद: सहस्रपरमा देवी शतमूला शताङ्कुरा | सर्वं हरतु मे पापं दूर्वा दुस्स्वप्ननाशिनी | | इस श्लोक में दिव्य प्रबंध अथवा द्रमिडोपनिषद के प्रति की हुयी प्रार्थना है। “देवी” शब्द मूल “दिवु” से आता है। दिवु – क्रीडाविजिगीषाव्यवहारद्युतिस्तुतिमोदमदस्वप्नकान्तिगतिषु। … Read more

द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् 2

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् << भाग 1 अभी तक यह चर्चा की गई की श्री शठकोप स्वामीजी वेदान्त के सर्वोच्च आचार्य है और श्री रामानुज स्वामीजी का श्री दिव्य प्रबंध के साथ गहरा संबंध था। आगे अब यह दर्शाया जाएगा की संस्कृत वेद, उनके उपब्राह्मण, और … Read more

द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् 1

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् श्री रामानुज स्वामीजी और दिव्य प्रबन्ध श्री दिव्य प्रबन्ध साक्षात आल्वारोंद्वारा प्रदत्त ज्ञान होने के कारण हमे श्री रामानुज स्वामीजी का श्री दिव्य प्रबन्ध के साथ जो संबन्ध है उसका अवलोकन करना आवश्यक है। ज्ञान की प्रणाली के साथ किसी के भी … Read more

विरोधी परिहारंगल (बाधाओं का निष्कासन) – २५

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रीवादिभीकरमहागुरुवे नमः श्रीवैष्णवों को अपने दैनिक जीवन में कैसी चुनोतियों का सामना करना पड़ता है इसका उपदेश श्रीरामानुज स्वामीजी ने वंगी पुरुत्तु नम्बी को दिया । वंगी पुरुत्तु नम्बी ने उस पर व्याख्या करके “विरोधि परिहारंगल” नामक ग्रन्थ के रूप में प्रस्तुत किया । … Read more

विरोधी परिहारंगल (बाधाओं का निष्कासन) – २४

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रीवादिभीकरमहागुरुवे नमः श्रीवैष्णवों को अपने दैनिक जीवन में कैसी चुनोतियों का सामना करना पड़ता है इसका उपदेश श्रीरामानुज स्वामीजी ने वंगी पुरुत्तु नम्बी को दिया । वंगी पुरुत्तु नम्बी ने उस पर व्याख्या करके “विरोधि परिहारंगल” नामक ग्रन्थ के रूप में प्रस्तुत किया । … Read more

विरोधी परिहारंगल (बाधाओं का निष्कासन) – २३

श्रीः  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः  श्रीवानाचलमहामुनये नमः  श्रीवादिभीकरमहागुरुवे नमः श्रीवैष्णवों को अपने दैनिक जीवन में कैसी चुनोतियों का सामना करना पड़ता है इसका उपदेश श्रीरामानुज स्वामीजी ने वंगी पुरुत्तु नम्बी को दिया । वंगी पुरुत्तु नम्बी ने उस पर व्याख्या करके “विरोधि परिहारंगल” नामक ग्रन्थ के रूप में प्रस्तुत किया । … Read more

विरोधी परिहारंगल (बाधाओं का निष्कासन) – २२

श्रीः  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः  श्रीवानाचलमहामुनये नमः  श्रीवादिभीकरमहागुरुवे नमः श्रीवैष्णवों को अपने दैनिक जीवन में कैसी चुनोतियों का सामना करना पड़ता है इसका उपदेश श्रीरामानुज स्वामीजी ने वंगी पुरुत्तु नम्बी को दिया । वंगी पुरुत्तु नम्बी ने उस पर व्याख्या करके “विरोधि परिहारंगल” नामक ग्रन्थ के रूप में प्रस्तुत किया । … Read more

श्रीवैष्णव तिरुवाराधन प्राक्कथन

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचलमहामुनये नमः तिरुवाराधन भगवान श्रीमन्नारायण अपनी निर्हेतुक कृपा से मंदिर, मठ, तिरुमाली में अर्चाविग्रह के रूप में अवतरित होते हैं। अर्चावतार तो भगवान की कृपा का अति उत्तम प्रकाशन है। विशेष रूप से हमारे तिरुमाली में विराजमान भगवान ही अति सुलभ हैं और उनकी … Read more

विरोधी परिहारंगल (बाधाओं का निष्कासन) – २१

 श्रीः  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः  श्रीवानाचलमहामुनये नमः  श्रीवादिभीकरमहागुरुवे नमः श्रीवैष्णवों को अपने दैनिक जीवन में कैसी चुनोतियों का सामना करना पड़ता है इसका उपदेश श्रीरामानुज स्वामीजी ने वंगी पुरुत्तु नम्बी को दिया । वंगी पुरुत्तु नम्बी ने उस पर व्याख्या करके “विरोधि परिहारंगल” नामक ग्रन्थ के रूप में प्रस्तुत किया । … Read more