श्रीवचन भूषण – सूत्रं १९२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम:

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अवतारिका

श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी एक विश्वसनीय व्यक्ति के शब्दों के माध्यम से दयालुतापूर्वक यह समझा रहे हैं कि जब भागवतों के प्रति गलतियाँ की जाती हैं तो भगवान उचित दंड देंगे।

सूत्रं – १९२

“ईश्वरन्‌ अवतरित्तुप्‌ पण्णिन आनैत्‌ तॊळिल्गळ्‌ एल्लाम्‌ भागवत अपचारम्‌ पोऱामै” एन्ऱु जीयर्‌ अरुळिच्चेय्वर्‌

सरल अनुवाद

श्रीवेदांती स्वामीजी दयापूर्वक कहते थे, “भगवान द्वारा अपने अवतारों में किए गए महान कर्म भागवतों के प्रति उनके अपराधों को सहन करने में असमर्थता के कारण हैं।“

व्याख्या

ईश्वरन्‌

अर्थात् – सबसे विश्वसनीय श्रीवेदांती स्वामीजी दयापूर्वक कहेंगे, “सर्वेश्वर, जो अपनी इच्छा/प्रतिज्ञा से ही सब कुछ संभालने में सर्वशक्तिमान हैं अपनी कद-काठी को कम करने के लिए अन्य प्रजातियों के समान अवतार लेते हैं और प्रह्लाद, महर्षियों आदि के प्रति उनके अपराधों को सहन न कर पाने के कारण स्वयं हिरण्यकशपू, रावण आदि का वध करने जैसे अलौकिक कार्यों में संलग्न होते हैं।”

अडियेन् केशव रामानुज दास

आधार – https://granthams.koyil.org/2021/08/15/srivachana-bhushanam-suthram-192-english/

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