श्रीवचन भूषण – सूत्रं १९३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम:

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अवतारिका

श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी भागवत अपचार की क्रूर प्रकृति को दर्शाने हेतु भगवान के शब्दों का प्रकटीकरण करते हैं।

सूत्रं – १९३

अवमान क्रिया:”

सरल अनुवाद

महाभारत अश्वमेधिक पर्व अवमान क्रिया: (अपमानजनक कार्य)।

व्याख्या

भगवान ने स्वयं महाभारत अश्वमेधिक पर्व में कहा है, या प्रीतिर्‌ मयि सम्व्रुत्ता मद्भक्तेशु सदा स्तुते  अवमान क्रिया तेशाम्‌ सम्हरति अखिलम्‌ जगत्‌ (जो प्रेम तुमने मेरे प्रति अर्जित किया है वैसा ही मेरे भक्तों के प्रति भी प्राप्त करो; उन भक्तों के प्रति किए गए कोई भी अपमानजनक कृत्य सभी लोकों को नष्ट कर देगा)।

अडियेन् केशव रामानुज दास

आधार – https://granthams.koyil.org/2021/08/16/srivachana-bhushanam-suthram-193-english/

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