श्रीवचन भूषण – सूत्रं २१३

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अवतारिका

श्री पिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी दयापूर्वक इस बात की एक और कमी बताते हैं [जिसे श्रेष्ठ जन्म मानकर भ्रम होता है]।

सूत्रं – २१३

अदुक्कु स्वरूप प्राप्तमान नैच्यम्‌ भाविक्क वेणुम्‌।

सरल अनुवाद

जिसका जन्म तथाकथित रूप से उच्च कुल में हुआ हो उसे विनम्रता अपनानी चाहिए जो आत्मा के वास्तविक स्वरूप के अनुकूल है।

व्याख्या

अदुक्कु …

उस जन्म के बारे में विस्तृत से बताते हुए , जिसका उल्लेख पहले किया गया था…

स्वरूप प्राप्तमान नैच्यम्‌ भाविक्क वेणुम्‌

भागवतों का अनुसरण करना आ में जो विनम्रता होती है—जो आत्मा के वास्तविक स्वरूप अर्थात ‘शेषत्व’ (सेवा-भाव) के अनुकूल है—उसे दूसरों (अर्थात जिन्हें तथाकथित रूप से निम्न जन्म वाला माना जाता है) को देखकर भी सीखना और अपनाना चाहिए।

अडियेन् केशव रामानुज दास

आधार – https://granthams.koyil.org/2021/09/06/srivachana-bhushanam-suthram-213-english/

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