श्रीवचन भूषण – सूत्रं १११
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब उनसे पूछा गया कि, “क्या ऐसे कोई [लक्ष्मण] नहीं है जिसने श्रीरामायण किष्किन्धा काण्ड ४.१२ के अनुसार कहा, ‘गुणैर्दास्यम् उपागतः’ (श्रीराम के विषय में लक्ष्मण कहते हैं कि मैं उनके गुणों से अभिभूत होकर उनकी सेवा कर रहा … Read more