कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – १४ – कलिङ्ग नर्दनम् (कालियदमन)
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << धेनुकासुर का वध (उद्धार) यमुना नदी के तट पर एक कालिय/कलिङ्ग नामक एक सर्प अपने परिवार के साथ रहता था। वह दुष्ट निरन्तर विष उगलकर तालाब को विषाक्त बना दिया ताकि कोई भी वहाँ न आ सके। यदि कोई वहाँ जाता … Read more