यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ६७
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ६६ श्रीवरवरमुनि स्वामीजी सभी श्रीवैष्णव सहित तिरुमला के पहाड़ों की ओर प्रस्थान किये और वहाँ श्रीशठकोप स्वामीजी और अन्य आऴ्वारों की पूजा किये। उन्होंने तिरुवाय्मोऴि नूट्र्न्दादि ६० के पाशुरों से “उलगुय्य माल निन्ऱ…मगिऴमाऱन् ताळिणैये चरणाग नेञ्जमे उळ ” (हे हृदय! हर्षित श्रीशठकोप … Read more