यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ४७
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ४६ आण्डपेरुमाळ् कन्दाडै अण्णन् के शरण होते हैं एक दिन श्रीवरवरमुनि स्वामीजी शुद्धस्तवम् अण्णा को बुलाकर बड़ी दया से उन्हें कहते हैं “श्रीमान बहुत भाग्यशाली हैं जैसे श्रीमधुरकवि स्वामीजी श्रीशठकोप स्वामीजी के प्रति थे वैसे श्रीमान भी पसंद किये जानेवाले व्यक्ति अण्णन् … Read more