यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ४७

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ४६ आण्डपेरुमाळ्  कन्दाडै अण्णन् के शरण होते हैं  एक दिन श्रीवरवरमुनि स्वामीजी शुद्धस्तवम् अण्णा को बुलाकर बड़ी दया से उन्हें कहते हैं “श्रीमान बहुत भाग्यशाली हैं जैसे श्रीमधुरकवि स्वामीजी श्रीशठकोप स्वामीजी के प्रति थे वैसे श्रीमान भी पसंद किये जानेवाले व्यक्ति अण्णन् … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ४६

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ४५ अण्णन् श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के शरण होते हैं  तत्पश्चात जैसे इस श्लोक में कहा गया हैं  रामानुजपदाम्बोज सौगन्द्य निदयोपियेअसाधारण मौनत्यमवधूय निजम्दिया।उत्तेजयन्तः स्वात्मानं तत्तेजस्सम्पदा सदास्वेषामतिशयं मत्वा तत्वेन शरणं ययुः॥ (जिन्होंने श्रीरामानुज स्वामीजी के दिव्य चरणों से सुगन्ध का धन प्राप्त किया हो, महानता … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ४५

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ४४ अण्णन् का अपने सम्बंधीयों सहित जीयर् स्वामीजी के मठ कि ओर प्रस्थान करना  जीयर् स्वामीजी के मठ में समाश्रयण के लिये नहीं जाने के लिये उन सम्बंधीयों में एम्बा ने कुछ का मन परिवर्तन कर दिया। कन्दाडै अण्णन् को इस विषय … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ४४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ४३ अण्णन् ने जीयर् स्वामीजी के शरण होने का निर्णय किया  तदागतां तां व्यतिदामनिन्दितां व्यभेदहर्षां परिधीनमानसाम्।शुभान्निमित्तानि शुभानिभेजिरे नरंश्रियाजुष्टमिवोपजीविनः ॥ (जैसे निधन जनों को धनी व्यक्ति मिलता और लाभ प्राप्त होता हैं, कुछ शुभ संकेतों से सीता माता प्राप्त कर स्वयं को खायम … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ४३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ४२ कन्दाडै अण्णन्  का स्वप्न  एक श्रीवैष्णव सीढ़ी से ऊपर से नीचे आये और उसके साथ लाये एक कोड़े से कन्दाडै अण्णन्  पर बरसे। हालाकि अण्णन् में उनके दण्ड को रोखने कि क्षमता थी पर उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने यह विचार … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ४२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ४१ जब आच्चि अपने पिताजी के तिरुमाळिगै में निवास कर रही थी तब कन्दाडै  अण्णन् के पिताजी देवराज तोऴप्पर् का श्राद्ध (तीर्थम्) होना था। अण्णन् ने आच्चि को बुलाया श्राद्ध के लिये प्रसाद बनाने को कहा। आच्चि भी वहाँ गई और पूर्ण … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ४१

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ४० तिरुमञ्जनमप्पा कि पुत्री श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के शरण हुई  एक प्रात: काल जब जीयर् अपने दिव्य स्नान हेतु कावेरी नदी कि ओर जा रहे थे तब अचानक ज़ोर से वर्षा होने लगी। इसलिये जीयर् राह में किसी के तिरुमाळिगै के बैठक में … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ४०

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ३९ तिरुमञ्जनमप्पा और भट्टर्पिरान् जीयर् श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के शरण होते हैं  प्रतिदिन श्रीवरवरमुनि स्वामीजी सूर्योदय से पहिले दिव्य कावेरी नदी में स्नान करने जाते।तिरुमञ्जनमप्पा जो पूर्णत: सत्व कैङ्कर्य में निरत थे और जो बिना कोई लाभ के श्रीरङ्गनाथ​ भगवान कि सन्निधी में … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ३९

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ३८ नायनार् द्वारा सन्यासाश्रम् स्वीकारना  उस समय दक्षीण दिशा से कुछ जन नायनार् के पास आकर नायनार् के हीं परिवार में किसी के मृत्यु का समाचार उन्हें सुनाया जिसके कारण उनका श्रीरङ्गनाथ भगवान के प्रति कैङ्कर्य में बाधा आगई। उन्होंने यह महसूस … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ३८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ३७ श्रीवरवरमुनि स्वामीजी श्रीकिडाम्बि नायनार से श्रीभाष्यम् पर व्याख्या को श्रवण किया  वहाँ काञ्चीपुरम् में उन्होंने श्रीकिडाम्बि नायनार् जो श्रीकिडाम्बि आच्चान् [वो जिन्हें श्रीगोष्ठीपूर्ण स्वामीजी ने श्रीरामानुज स्वामीजी के लिये प्रसाद बनाने के कैङ्कर्य के लिये नियुक्त किया] के वंशज से हैं … Read more