यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग २७
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग २६ एक दिन श्रीशैलेश स्वामीजी ने अपने उपवन में उत्पन्न ताजी सब्जीयाँ श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के तिरुमाळिगै में भेजा। श्रीवरवरमुनि स्वामीजी बहुत प्रभावित होकर श्रीशैलेश स्वामीजी से पूछे “आप दास के तिरुमाळिगै में भेजने के बजाय यह सब आऴ्वार् (श्रीशठकोप स्वामीजी के मन्दिर) … Read more