यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ५१
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ५० एऱुम्बियप्पा श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के शरण होते हैं तत्पश्चात एक श्रीवैष्णव तिरुमला जाते समय एऱुम्बि में पधारे। अप्पा की दृष्टी उनपर पड़ी, उन्होंने उन्हे आमंत्रण दिया और उन्हें कृपाकर श्रीरङ्गम् मन्दिर और श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के विषय में बताने को कहा। उन … Read more