यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ७६

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ७५ आश्चर्यजनक घटना जो अण्णन्  के तिरुमाळिगै में घटी  जब सभी जन मन्दिर में इकट्ठे हुए ईडु उत्सव के चाट्ट्रुमुऱै को देखने के लिये तब कन्दाडै अण्णन् कि धर्मपत्नी और अन्य महिलाएँ जिन्हें सम्प्रदाय का अच्छा ज्ञान था श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के वैभव … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ७५

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ७४ भगवदविषय चाट्ट्रुमुऱै  पहिले के जैसे भगवान कृपाकर श्रीशठकोप स्वामीजी, श्रीपरकाल स्वामीजी, श्रीविष्णुचित्त स्वामीजी और श्रीरामानुज स्वामीजी के साथ पधारे और अन्यों के साथ दिव्यप्रबन्ध के व्याख्यानों को सुने और श्रीवरवरमुनि स्वामीजी कि प्रशंसा किये। उन्हें श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के वैभव को … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ७४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ७३ श्रीरङ्गनाथ भगवान श्रीवरवरमुनि स्वामीजी को भगवद विषयम् पर कालक्षेप करने कि आज्ञा करते हैं  श्लोक के अनुरूप  ततः कदाचित् आहूय तमेनं मुनिपुङ्गवम्!सत्कृतं साधुसत्कृत्य चरणाब्ज समर्पणात्सन्नितौ मेनिषीतेति शशासमुरशासनःमहान्प्रसाद इत्यस्य शासनं शिरसावहन्तदैवत्र व्याख्यातुं तत्क्षणात् उपचक्रमेश्रीमति श्रीपतिस्स्वामि मण्टपे महतिस्वयम्तद्वन्तस्य प्रबन्दस्य व्यक्तन्तेनैव दर्शिनम्शठवैरिमुखैः श्रृण्वन् देशिकैर्दिव्यदर्शनैःअथ … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ७३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ७२ जैसे की इन पाशुरों में कहा गया हैं वें प्रतिदिन अपने भाग्य कि महानता पर ध्यान करते जिसे उन्होंने प्राप्त किया था। जैसे कि श्लोक में उल्लेख किया गया हैं वह प्रतिष्ठित जनों कि दिव्य गोष्ठी कि पूजा करता रहा  अन्तः … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ७२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ७१ श्रीवरवरमुनि स्वामीजी आचार्य स्थानों में अपने प्रमुख शिष्यों को विराजमान कर अभिषेक किया  एक दिन श्रीवरवरमुनि स्वामीजी ने श्रीप्रतिवादि भयङ्कर् अण्णा स्वामीजी को बुलाकर कहा कृपाकर कन्दाडै अण्णन्, पोरेट्रु नायनार्, अनन्तैय्यनप्पै, एम्पेरुमानार् जीयर् नायनार् और कन्दाडै नायन् को श्रीभाष्य (व्यास महर्षि … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ७१

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ७० श्रीपरकाल स्वामीजी का  मङ्गळाशासन्  करने के पश्चात श्रीवरवरमुनि स्वामीजी ने वयलाळि मणवाळन् (तिरुवालित तिरुनगरी में भगवान) जो श्रीपरकाल स्वामीजी को प्रिय थे कि पूजा किये। वें फिर दयाकर तिरुमणङ्गोल्लै (वह स्थान जहां भगवान ने श्रीपरकाल स्वामीजी को तिरुमन्त्र का उपदेश दिया … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ७०

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ६९ श्रीवरवरमुनि स्वामीजी ने तिरुवालि तिरुनगरि में श्रीपरकाल स्वामीजी कि पूजा किये  तत्पश्चात जैसे इस श्लोक में उल्लेख हैं  अहिराजशैलमपितो निरन्तरं बृतनाशते नसविलोकयन् ततः। अवरुह्य दिव्यनगरं रमास्पदं भुजकेशयं पुनरुपेत्यपुरुषम्॥  (उन श्रीवरवरमुनि स्वामीजी ने अपने शिष्यों के साथ अपने नेत्र को बंद किये बिना … Read more

तिरुप्पावै अनुभव – अर्थ पंञ्चकम्

।।श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः।। तिरुप्पावै उभय (दो- संस्कृत और तमिऴ्) वेदांतों का सार है। जब हम इसके अंतर्निहित अर्थों को अच्छे से समझ लेते हैं, तो एम्पेरुमान् (भगवान श्रीमन्नारायण) को हम प्राप्त करने के मार्ग में जो भी बाधाएँ हैं वे सब सहज रूप से दूर हो जाती हैं। अपने … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ६९

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ६८ तिरुमलैयोऴुगु मन्दिर में घटना और प्रथाओ पर तिरुमला मन्दिर द्वारा अनुरक्षण और अद्यतन किया गया एक ग्रन्थ हैं और इस नियुक्ति का विवरण दिया गया हैं [श्रीवरवरमुनि स्वामीजी द्वारा चिऱिय केळ्वि जीयर् ]। श्रीरामानुज स्वामीजी के समय श्रीवेङ्कटेश भगवान के धन … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ६८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ६७ श्रीवरवरमुनि स्वामीजी ने फिर इस पाशुर को रचा और अनुसन्धान किया  तिरुमगळ् मरुवुम् इरुपदम् मलरुम् मुऴन्दाळ्कळुम् कुऱङ्गुम् ताङ्गुचेक्कर् अम्मामुगिल् पोलत् तिरुवरैच् चेम्बोनम्बरमुम्अरुमैसेर् सीरावुम् अयनैत् तन्ददोर् उन्दियुम् अमुदमार् उदरबन्दनमुम्अलर्मेल् मङ्गै उऱै तिरुमार्वमुम् आरमुम् पदक्क नन्निरैयुम् पेरुवरै अनैय बुयम् ओरु नाङ्गुम् पिऱङ्कडलाऴियुम् चङ्गुम्पेऱु … Read more