यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग २२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग २१ श्रीअऴगिय मणवाळ मामुनिगळ (श्रीवरवरमुनि स्वामीजी) का दिव्य अवतार  तुर्की से आक्रमण और अन्य कारणों से प्रपत्ति मार्ग (शरणागति मार्ग या भगवान के शरण होना) शिथिल हो गया। श्रीरङ्गनाथ भगवान जो श्रीमहालक्ष्मी अम्माजी के स्वामी हैं, जो दया से भरे हैं और … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग २१

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग २० श्रीशैलेश स्वामीजी और श्रीविळाञ्चोलैप्पिळ्ळै  श्रीशैलेश स्वामीजी अपने दिव्य मन में यह निश्चित करते हैं कि उन्हें तिरुवनन्तपुरम जाकर श्रीविळाञ्चोलैप्पिळ्ळै स्वामीजी का अभिवादन कर उनसे सम्प्रदाय के गूढ़ार्थ सीखना चाहिये। आऴवार  के मुख्य शिष्य होने का गौरव प्रगट कर वें मंदिर के … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग २०

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग १९ श्रीशैलेश स्वामीजी ने श्रीनालूराच्चान पिळ्ळै को साष्टांग दण्डवत प्रणाम कर उनके समक्ष प्रस्तुत हुए। श्रीनालूराच्चान पिळ्ळै ने उन्हें स्वीकार कर उन्हें ईडु (श्रीसहस्रगीति पर कालक्षेप जिसे श्रीकृष्णपाद स्वामीजी ने श्रीकलिवैरिदास स्वामीजी के कालक्षेप के आधार पर लिखे थे) सिखाना प्रारम्भ किया। … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग १९

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग १८ तत्पश्चात श्रीकूर कुलोत्तम दास नायन को यह अहसास हो गया कि वें अपने अन्तिम दिनों में हैं इसलिये श्रीशैलेश स्वामीजी को बुलाकर कहा “आपको जो भी सम्प्रदाय के अन्य ग्रन्थ के गूढ़ार्थ सीखने कि लालसा हो आप श्रीविळाञ्चोलैप्पिळ्ळै स्वामीजी के पास … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग १८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग १७ श्रीशैलेश स्वामीजी का वैभव  श्रीपिळ्ळैलोकाचार्य​ स्वामीजी के परमपद प्रस्थान के पश्चात श्रीशैलेश स्वामीजी कि माताजी जो श्रीपिळ्ळैलोकाचार्य​ स्वामीजी कि शिष्या भी थी उनके वियोग को सहन न कर सकी और उन्होंने  भी परमपद कि ओर प्रस्थान किया। श्रीशैलेश स्वामीजी अपनी मामी … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग १७

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग १६ उन्होंने श्रीतोऴप्पर् स्वामीजी के पुत्र अप्पन पिळ्ळै को सांत्वना दि जो उनके संग हीं था और उनसे कहा “शोक मत करो क्योंकि उन्होंने अपना दिव्य रूप श्रीशठकोप स्वामीजी के कैंकर्य के लिये दिया हैं; श्रीशठकोप स्वामीजी तुम्हें अपना पुत्र मानते हैं; … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग १६

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग १४ अब आऴवार् कि घटनाएं जब श्रीरङ्गनाथ भगवान कोऴिक्कोडु से प्रस्थान किये तब लोगों के पद (अर्चक या स्थानांत्तर) और लोगों के निवास (स्थलत्तार) के अनुचित्त बोली के कारण आऴवार् उनके संग न जा सके। उस समय पूर्व और पश्चिम (कोऴिक्कोडु में … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग १५

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग १४ अब श्रीरङ्गनाथ भगवान के विषय में घटनायें  श्रीरङ्गनाथ भगवान ज्योतिषकुड़ी को छोड़ तिरुमालिरुज्चोलै दिव्यदेश पहुँचे जिसे श्रीरङ्गम् के समान माना गया हैं। श्रीपिळ्ळैलोकाचार्य स्वामीजी से बिछुड़ने के दु:ख को भूलकर श्रीरङ्गनाथ भगवान यह तथ्य के साथ तिरुमालिरुज्चोलै में निवास किया की … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग १४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग १३ श्रीरङ्गनाथ​ भगवन का मन्दिर से उत्प्रवास करना जबकि श्रीपिळ्ळैलोकाचार्य स्वामीजी प्रमाण (प्रामाणिक ग्रन्थ जैसे वेद, आदि), प्रमेय (भगवान) और प्रमातृ (कई ग्रन्थ के लेखक) के गौरव को बनाने में लगे थे ताकि सभी चेतन उपर उठ सके और वह भगवान श्रीरङ्गनाथ​ … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग १३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग १२ श्रीवरवरमुनि स्वामीजी कहे कि श्रीवचन भूषण दिव्य शास्त्र बड़ी दया से श्रीरन्ङ्गनाथ् भगवान कि आज्ञा से रचि गई हैं इसलिये उपर कि घटना किसी के भी मन में श्ंखा उत्पन्न करती हैं। इससे तो बेहतर होगा कि शिक्षित जनों से अपनी … Read more