द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् 28
श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् << भाग 27 सन्तमिगु तमिळ् मरैयोन् , वेदान्तगुरु (वेदान्ताचार्य) (द्रमिडोपनिषद् प्रभावसर्वस्व का अन्तिम अध्याय) स्वामी देशिक (वेदान्ताचार्य) जी स्पष्टरूप से कहते है कि संस्कृत वेद को समझने के लिये सर्वप्रथम अरुलिच्चेयल (दिव्यप्रबन्ध) का अध्ययन करना अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है | दिव्य प्रबन्ध केवल … Read more