द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् 3
श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् << भाग 2 श्री तैत्तरीय उपनिषद: सहस्रपरमा देवी शतमूला शताङ्कुरा | सर्वं हरतु मे पापं दूर्वा दुस्स्वप्ननाशिनी | | इस श्लोक में दिव्य प्रबंध अथवा द्रमिडोपनिषद के प्रति की हुयी प्रार्थना है। “देवी” शब्द मूल “दिवु” से आता है। दिवु – क्रीडाविजिगीषाव्यवहारद्युतिस्तुतिमोदमदस्वप्नकान्तिगतिषु। … Read more