द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् 26
श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् << भाग 25 श्रीशठकोप स्वामी एवं कुरेश स्वामी (आळ्वार एवं आळ्वान) श्रीकूरेश स्वामी द्वारा विरचित, अतिमानुष स्तव का तीसरा श्लोक भी आप श्री का आळ्वार के प्रति अत्यन्त प्रेम भावना को प्रकाशित करता है :: श्रीमत् परान्कुश मुनीन्द्र मनोविलासात् तज्जानुरागरसमज्जनं अञ्जसाप्य | … Read more