वेदार्थ संग्रह: 7
श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः वेदार्थ संग्रह: << भाग ६ वेदों के महत्त्व की समझ अद्वैत की आलोचना अंश १५ पिता अपने बेटे को स्पष्ट करने की कोशिश करता है कि उसके दिमाग में क्या है। ब्रह्म का सच्चा चरित्र चेतना और् आनंद है, जो दोष से बेदाग है। उसकी महिमा … Read more