प्रपन्नामृत – अध्याय ४५

प्रपन्नामृत – अध्याय ४५ चेलाञ्चलाम्बा का वृत्तान्त भाग १/२ 🔹यतिराज अपने शिष्योंको साथ चेलाञ्चलाम्बा के घर पधारें। 🔹चेलाञ्चलाम्बा ने उनका आदर सत्कार करके प्रसाद पाने का आग्रह किया। (रामानुजाचार्य काषाय वस्त्रमें ना होनेके कारण चेलाञ्चलाम्बा उनको पहचान नही पायीं) 🔹उन श्रीवैष्णवोंका प्रसाद के लिये संकोच देखकर चेलाञ्चलाम्बा ने बताया की वें भी रामानुजाचार्य की शिष्यां … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ४४

प्रपन्नामृत – अध्याय ४४ पश्चिम दिशा में प्रस्थान 🔹कृमिकण्ठ राजा दुर्जन, श्रीवैष्णवद्वेषी, भगवान श्रीमन्नारायण का निन्दक था और श्रीवैष्णव धर्म से इसको बड़ा विरोध था। 🔹श्रीवैष्णव विरोधी सम्मतिपत्र पर सबके बलपुर्वक हस्ताक्षर करवाके यह आदेश दिया कि जो वैष्णवत्व का आचरण करेगा उसको कठिन दण्ड दिया जायेगा। 🔹राजा के मंत्रीपरिषद के एक सदस्यने (जो कुरेशाचार्य … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ४३

प्रपन्नामृत – अध्याय ४३ कृमिकंठ चोलराज की उत्पत्ति का कारण 🔹जिसप्रकार पुत्र के सुयोग्य होनेपर पिता अपना समस्त कार्यभार पुत्र पर सौंप देता है उसी प्रकार अपनी दोनों विभूतियों का कार्य यतिराज को सौंपकर भगवान निश्चिन्ह होगये। 🔹यतिराज और उनके आदेष से ७४ पीठाधीश्वर ने अहर्निश श्रीवैष्णवता का प्रचार करनेमें जीवन लगादिया। 🔹सारा भारत श्रीवैष्णवमय … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ४२

  प्रपन्नामृत – अध्याय ४२ आचार्य कृपा ही मोक्ष का उपाय है 🔹श्री महापुर्णाचार्य स्वामीजीने आचार्य आज्ञा से मानेरनम्बि नामक क्षुद्र कुलोत्पन्न महात्मा का ब्रह्ममेध विधी से दाह संस्कार किया। 🔹समस्त रुढिवादी ब्राह्मणोंने धर्म विरुद्ध कार्य बताकर उनकी निन्दा की और उनको पतित मानने लगे। 🔹श्रीमहापूर्णाचार्य की पुत्री अतुलायी ने सभी लोगोंके सामने कहा, “मेरे … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ४१

प्रपन्नामृत – अध्याय ४१ धनुर्धरदास का उत्कर्ष 🔹रंगनाथ भगवान के ब्रह्मोत्सव के समाप्ति के दिन भगवान कावेरी स्नान के लिये पधारे तो रामानुजाचार्य भी वहाँ अपने अंतरंग शिष्य धनुर्धरदास के कंधे का सहारा लेकर उपस्थित हुये। 🔹ब्राह्मण शिष्योंने ईर्ष्या द्वेश उच्चकुलाभिमान के वशीभूत होकर यतिराज से इसका कारण पूछा। 🔹यतिराजनें स्पष्ट किया “विद्या, धन, कुल … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ४०

  प्रपन्नामृत – अध्याय ४० धनुर्धरदास पर यतिराज की कृपा 🔹निचुलापुरीमें धनुर्धरदास नामक एक बलशाली विशाल सुदृढ शरीरवाला तथा मल्लविद्यामें निपुण पहलवान रहता था। 🔹धनुर्धरदास एक हेमाम्बा नामक युवती के प्रेममें आसक्त होकर उसके सुन्दर विशाल नेत्र निहारनेमें मग्न रहता था। 🔹एकबार श्रीरंगममें रंगनाथ भगवानका ब्रह्मोत्सव के दर्शन करने हेतु हेमाम्बा आयी हुयी थी। 🔹धनुर्धरदास … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ३९

प्रपन्नामृत – अध्याय ३९ श्रीपराशर भट्टार्य का विवाह भाग १/२ 🔹पराशर भट्टार्य ने बालक अवस्थामें रंगनाथ भगवान के निमित्त रखे गये दूध का स्पर्श किया था। 🔹जब लोगोंनें कहा की बालक का स्पर्श किया हुवा दूध भगवान के योग्य नही है तब भगवान ने कहा, “यह बालक मेरे प्रसाद से जन्मा इसलिये मेरा पुत्र है”। … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ३८

प्रपन्नामृत – अध्याय ३८ श्री पराशर भट्टार्य का अवतार 🔸एक दिवस निरन्तर वर्षा के कारण कुरेश स्वामीजी ऊञ्छवृत्ति के लिये घर से बाहर नही निकल सकें। 🔸संग्रहवृत्ति नही होनेके कारण उनके के पास कुछ भी भोजन सामग्री नही थी। अत: वें रात्रिमें भूखे ही शयन किये। 🔸रात्रिमें रंगनाथ भगवान के मंदिरमें भोग लगनेका बाजा सुनकर … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ३७

प्रपन्नामृत – अध्याय ३७ श्रीकुरेश का सम्पत्ति त्याग 🔸काँची के समीप कुरम गाँव के स्वामी कुरेश थे, जो प्रख्यात, धनवान, दानवीर थे। 🔸वें सुर्योदय से रात्रि के दो प्रहर तक निरन्तर अन्नदान देते थे। 🔸विशाल अन्नशाला के भारी किवांड रात्रिमें बंद करते समय मेघ गर्जन के समान ध्वनि उत्पन्न होती थी। 🔸जब कांचीमें वरदवल्लभा अम्माजी … Read more

प्रपन्नामृत – अध्याय ३६

प्रपन्नामृत – अध्याय ३६ श्रीरामानुजाचार्य की तीर्थयात्रा 🔹रामानुजाचार्य का दृढव्रत देखकर जगन्नाथ भगवान ने सोचा की अगर सेवा पद्धति बदलदी गयी तो मेरे आश्रित यह अर्चक वृत्तिहीन होकर कष्ट भोगेंगे। 🔹उसी रात्रिमें भगवान ने रामानुजाचार्य को निद्रा में ही जगन्नाथपुरी से दूर कूर्मस्थलमें पहुँचाया। 🔹यतिराज विस्मित हुये परंतु कुर्मनायक भगवान की आज्ञा से वहाँ बिराजे … Read more