लोकाचार्य स्वामीजी की दिव्य-श्रीसूक्तियां – ६
श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचलमहामुनये नमः लोकाचार्य स्वामीजी की दिव्य-श्रीसूक्तियां << पूर्व अनुच्छेद नम्पिळ्ळै तिरुवल्लिकेणि ५१) मुन्बु मुकम् तोट्ट्राते (तोत्ताते) निन्रानागिलुम् आबत्तु वन्दवारे मुकम् काट्टि रक्षिक्कुमवनायिट्ट्रु (रक्षिक्कुमवनायित्तु) | अवनिप्पडि इरुप्पानोरुवनागैयाले स्वाराधन् | हालांकि बहुत लम्बे समय तक भगवान् प्रकट नही होते व दर्शन नही देते पर जब भी भक्त … Read more