यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग १०६

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग १०५ जैसे प्रणवम् [ॐ] को “यद्वेदादौस्वरः प्रोक्तो वेदान्तेच प्रतिष्ठितः” कहा जाता हैं (प्रणवम का पाठ वेदों के पाठ के प्रारम्भ और अंत में किया जाता हैं), यह तनियन [श्रीशैलेश दयापात्रं:] जिसकी यहाँ रेखांकित की गई महिमा हैं और श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के स्तुति … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग १०५

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग १०४ यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – अनुबंधम्  श्रीशैलेश मन्त्र का वैभव  श्रीशैलेश दयापात्रं धीभक्तयादिगुणार्णवम् । यतीन्द्रप्रवणं वन्दे रम्यजामातरं मुनिम् ॥  यह सर्वविदित हैं कि श्रीरङ्गनाथ भगवान ने कृपाकर श्रीवरवरमुनि स्वामीजी पर उनके शिष्य के रूप में इस तनियन् कि रचना किये। हमारे लिये यह … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग १०४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग १०३ श्रीवरवरमुनि स्वामीजी वाऴित्तिरुनामम्   इप्पुवियिल् अर्ङ्गेसर्क्कु ईडळित्तान् वाऴिये   एऴिल् तिरुवाय्मोऴिप्पिळ्ळै इणैयडियोन् वाऴियेऐपसियिल् तिरुमूलत्तु अवतरित्तान् वाऴिये   अरवरसप्पेरुञ्जोदि अनन्तन् एन्ऱुम् वाऴियेएप्पुवियुम् श्रीशैलम् एत्तवन्दोन् वाऴिये    एरारुम् एदिरासर् एनविदित्तान् वाऴियेमुप्पुरिनूल् मणिवडमुम् मुक्कोल्तरित्तान् वाऴिये   मूदरिय मणवाळमामुनिवन् वाऴिये नाळ् पाट्टु चेन्दमिऴ् वेदियर् चिन्दै तेळिन्दु चिऱन्दु मगिऴ्न्दिडु नाळ्    सीरुलगारियर् सेय्दरुळ् न​ऱ्कलै तेसुपोलिन्दिडु नाळ्मन्दमदिप्पुवि मानिडर् … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग १०३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग १०२ शिष्य दृढ़ता से श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के साथ जुड़े हुए हैं  इस प्रकार सभी शिष्य जो श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के दिव्य चरणों के शरण हुए है वें आचार्य अभिमान निष्ठा (आचार्य के प्रति श्रद्धा और दृढ़ता के साथ रहना) के साथ रहते थे, … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग १०२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग १०१ एऱुम्बियप्पा का आग्रह  फिर एऱुम्बियप्पा को भी श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के दिव्य श्रीवैकुण्ठ पधारने के समाचार प्राप्त हुआ और जैसे इस श्लोक में कहा गया हैं  वरवरमुनि पतिर्मे ततपदयुगमेव शरणमनुरूपम्।तस्यैव चरणयुगळे परिचरणं प्राप्यमिति ननुप्रताम्॥ (श्रीवरवरमुनि स्वामीजी दास के स्वामी हैं; उनके दिव्य … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग १०१

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग १०० वानमामलै जीयर् स्वामीजी कृपाकर लौटते हैं  तत्पश्चात वानमामलै जीयर् स्वामीजी उत्तर भारत कि यात्रा से लौटे; जब वें तिरुमला के निकट थे तब उन्होंने श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के श्रीवैकुण्ठ को पधारने के समाचार सुने। वें निराश महसूस कर रहे थे। वें तिरुमला … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग १००

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ९९ श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के वियोग में शिष्यों को पीड़ा हुई  तत्पश्चात जैसे कि कहा गया हैं “कदिरवन् पोय् गुणपाल् सेर्न्द महिमै पोल्” (जैसे सूर्य कि महानता पूर्व दिशा में पहुँचती हैं), पूर्व दिशा में सूर्य का अस्त होना। शिष्य जैसे जीयर् नायनार्, … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ९९

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ९८ श्रीवरवरमुनि स्वामीजी का अंतिम संस्कार  तत्पश्चात उनके अन्त्येष्टि क्रिया करने के लिये उनके प्रमुख शिष्य और परमज्ञानी पौत्र जीयर् नायनार् कावेरी नदी में स्नान तथा ऊर्ध्वपुण्ड्र तिलक धारण किया। फिर उन्होंने चांदी के घड़े में श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के तिरुमञ्जन के लिये … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ९८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ९७ श्रीवरवरमुनि स्वामीजी अपने अंतिम काल में कृपापूर्वक ४००० दिव्य प्रबन्ध का श्रवण करते हैं। फिर उन्होंने कृपापूर्वक उन्होंने अपने शिष्यों को व्यक्तिगत रूप से बुलाकर उन्हें अनुकूल निर्देश दिये। जब श्रीवैकुण्ठ, जिसे कलङ्गाप् पेरुनगरम्  (महान स्थान जो कभी भी भ्रम का … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ९७

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ९६ जब श्रीवरवरमुनि स्वामीजी ऐसे स्थिति में थे तब मेल्नाट्टुत् तोऴप्पर् और उनके भ्राता अऴगिय मणवाळप्पेरुमाळ् नायनार् जीयर् कृपाकर श्रीरङ्गनाथ भगवान कि पूजा करने हेतु श्रीरङ्गम् में पधारे। श्रीभट्टर्पिरान् जीयर् स्वामीजी उन्हें तेन्माडवीदी (आज के समय में तेऱ्कु उत्तर वीथी) में मिले … Read more