प्रपन्नामृत – अध्याय ५७
श्रीकुरेशाचार्य की आचार्य निष्ठा 🔹एकबार श्रीकुरेशाचार्यने रंगनाथ भगवान की सन्निधी में आकर भगवान का मंगलाशासन किया। 🔹रंगनाथ भगवानने अति प्रसन्न होकर उनसे मनोवांछित वर मांगनेको कहा। 🔹श्रीकुरेशाचार्य ने कहा, “आपने मुझे पहले से ही सबकुछ दिया है, अब कुछ भी कामना नहीं है।” 🔹भगवान ने पुन: आग्रह करनेपर श्रीकुरेशाचार्य बोले, “आप मुझे परमपद दे दीजिए।” … Read more