यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ६४
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ६३ तत्पश्चात श्रीअण्णा स्वामीजी दयाकर कन्दाडै अण्णा के दिव्य तिरुमाळिगै कि ओर प्रस्थान करते हैं। अण्णा स्वामीजी उनके स्वागत हेतु पधारते हैं और जैसे कि कहा गया हैं “वैष्णवो वैष्णवं धृत्वा दण्डवत् प्रणमेत् भुवि” (अगर दो श्रीवैष्णव एक दूसरे से मिलते हैं … Read more