यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ६३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ६२ जब श्रीप्रतिवादी भयङ्कर् अण्णा स्वामीजी श्रीवेङ्कटेश भगवान के तिरुवाराधनम् में तिरुमञ्जनम् के लिये आकाशगङ्गा से जल लाने कि सेवा कर रहे थे तभी श्रीरङ्गम्  से एक श्रीवैष्णव तिरुमला से श्रीवेङ्कटेश भगवान कि पूजा करने पधारे। अण्णा स्वामीजी ने उन श्रीवैष्णव कि … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ६२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ६१ वेडलप्पै के सहायता से कुदृष्टि को अस्वीकार करना  एक व्यक्ति जो कुदृष्टि तत्त्व में संलग्न था श्रीरङ्गम्  के मन्दिर में आया और तत्त्वों को सिखाने में बड़ा अभिमानी था। जबकी श्रीवरवरमुनि स्वामीजी सभा में उनसे बहस करने और उन्हें चुप करने … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ६१

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ६० श्रीवैष्णवों के गुणों कि व्याख्या करना  श्रीरङ्गम् भगवान श्रीरङ्गनाथ का एक दिव्य निवास स्थान हैं जहां उत्तर और दक्षिण दोनों से भक्त दर्शन हेतु पधारते थे। श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के उकत्यानुष्ठान (वचनों और कैङ्कर्य) को सुनकर उत्तर भारत से एक श्रीवैष्णवप्रभु ने … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ६०

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ५८ नीचे दिये गये श्लोक में वर्णित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से श्रीवरवरमुनि स्वामीजी ने लोगों को स्वीकार्य/अस्वीकार्य गतिविधियों को करने के दौरान होने वाले शुभता/अपराधों  को दिखाकर सभी का उत्थान किया पक्षितं हि विषमहन्ति प्राकृतं केवलं वपुः।मन्त्रौषधमयीतत्र भवत्येव प्रतिक्रिया॥ दर्शनस्पर्ष … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ५९

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ५८ उन श्रीवैष्णवों को सुधारना जो उनके मध्य में शत्रुता पाल रहे हैं  दो श्रीवैष्णव आपस में अहंकार के कारण बहस कर रहे थे। उसी स्थान पर दो कुत्ते भी झगड़ रहे थे। श्रीवरवरमुनि स्वामीजी ने यह देखा और उन कुत्तों … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ५८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ५७ श्रीवरवरमुनि स्वामीजी कृपाकर व्याख्यान कि रचना किये  जैसे कि कहा गया हैं “भूत्वा भूयो वरवरमुनिर भोगिनां सार्वभौम श्रीमद रङ्गेवसति विजयी विश्वसंरक्षनार्थम्” (आदिशेष इस संसार के रक्षण हेतु श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के रूप में अवतार लिए और भव्य से श्रीरङ्गम्  में निवास … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ५७

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ५६ श्रीवरवरमुनि स्वामीजी ने श्रीवानमामलै जीयर् स्वामीजी और अन्य श्रीवैष्णवों को अप्पिळ्ळै और अप्पिळ्ळार्  को लाने के लिये भेजा। वें भी कृपाकर उन्हें लाने के लिये निकल पडें और उनके आने कि सूचना पहिले ही अप्पिळ्ळार् के पास बिजवा दिया। अप्पिळ्ळार् … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ५६

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ५५ अप्पिळ्ळै (श्रीप्रणतार्तिहारी स्वामीजी) और अप्पिळ्ळार् (श्रीरामानुज स्वामीजी) श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के दिव्य चरणों के शरण होते हैं  सात गोत्रों के नियम को सम्पन्न कर एऱुम्बियप्पा एऱुम्बि लौटने का निर्णय करते हैं परन्तु पूर्वसंकेत शुभ नहीं थे। उन्होंने श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के समक्ष … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ५५

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ५४ इसी बीच में एऱुम्बियप्प्पा उस समय के दौरान जब वें वहाँ थे श्लोक के अनुसार  इत्थं दिने दिने कुर्वन्वृत्तिं पद्युः प्रसादिनीम्। कृतीर्  कडापदं चक्रे प्राक्तनीं वर्तनीम्॥ इत्थं दिने दिने कुर्वन्वृत्तं भर्तु: प्रसादिनीम्।कृति कण्ठा पदज्चक्रे प्राक्तनीं तत्र वर्तनीम्॥ श्रीवरवरमुनि स्वामीजी ने भगवान … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ५४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ५३ तत्पश्चात श्रीवरवरमुनि स्वामीजी जैसे श्लोक में कहा गया हैं  ततः सजमूलजितस्याम कोमलविग्रहे।पीतकौशेयसं विधे पीनव्रुत्त चतुर्भुजे॥ शन्खचक्र गदाधरे तुङ्ग रत्न विभूषणे।कमला कौस्तुभोरस्के विमलायत लोचने॥ अपरादसहे नित्यं दहराकास गोचरे।रेमेधाम्नि यथाकाशं युज्ञानो ध्यान सम्पदा॥ सतत्र निश्चलं चेतः चिरेण विनिवर्तयन्। श्रीवरवरमुनि स्वामीजी ध्यान समृद्धि … Read more