श्रीः। श्रीमते शठकोपाय नमः। श्रीमते रामानुजाय नमः। श्रीमद्वरवरमुनये नमः।
७. पराङ्कुश
‘अंकुश’ हाथी को हाँकने या नियंत्रित करने का लोहे का नुकीला छोटा भाला या छड़ है।
उसी प्रकार श्री शठकोप स्वामी ने अपने दिव्य ज्ञान, भगवदनुभव और दिव्यप्रबन्धों के प्रभाव से वेद-विरुद्ध तथा वेदों के विपरीत अर्थ करने वाले विभिन्न मतों के आचार्यों का खण्डन कर उन्हें पराजित किया। इसीलिए वे “परांकुश” नाम से विख्यात हुए।
इस दिव्य नाम का एक और अत्यन्त मधुर एवं रहस्यपूर्ण अर्थ भी है। यहाँ ‘पर’ शब्द का अर्थ है – परब्रह्म, श्रीमन्नारायण। अतः परांकुश का अर्थ है –
वे महापुरुष जिन्होंने अपने निष्कपट प्रेम, अनन्य भक्ति और दिव्यप्रबन्ध रूपी अमृतमय पाशुरों के द्वारा स्वयं परमात्मा श्रीमन्नारायण को भी अपने प्रेम से वशीभूत कर लिया।
श्री शठकोप स्वामी की भगवद्भक्ति, आत्मसमर्पण तथा दिव्य अनुभव से परमानन्दित होकर स्वयं भगवान उनके प्रेम के अधीन हो गए। भक्तवत्सल भगवान अपने परमभक्त की प्रेम-भक्ति से बँध जाते हैं।
इसी कारण आऴ्वार् को “परांकुश” की दिव्य उपाधि प्राप्त हुई।
अतः “परांकुश” नाम के दो प्रमुख भावार्थ हैं:
प्रथम – वे, जिन्होंने वेद-विरोधी एवं मिथ्या मतों का खण्डन कर धर्म की प्रतिष्ठा की।
द्वितीय – वे, जिन्होंने अपने निष्कपट (विशुद्ध) प्रेम और दिव्यप्रबन्धों द्वारा स्वयं श्रीमन्नारायण को भी प्रेमवश अपने अधीन कर लिया।
८. उदयभास्कर
‘भास्कर’ का अर्थ है, सूर्य, जो समस्त अन्धकार का नाश कर जगत् को प्रकाश प्रदान करता है।
उसी प्रकार श्री शठकोप स्वामी अपने दिव्य ज्ञान, दिव्यप्रबन्ध और भगवदनुभूति के प्रकाश से जीवों के हृदय में व्याप्त अज्ञानरूपी अन्धकार का निवारण करते हैं। इसीलिए उन्हें “उदयभास्कर” कहा जाता है।
‘उदयभास्कर’ अर्थात् अरुणोदयकालीन सूर्य।
प्रातःकाल का सूर्य अत्यन्त शीतल, सौम्य और सुखदायक होता है। वह बिना किसी तीव्रता के धीरे-धीरे समस्त अन्धकार को दूर कर देता है।
उसी प्रकार श्री शठकोप स्वामी भी अपने करुणामय उपदेशों, दिव्यप्रबन्धों तथा भगवदनुभव के माध्यम से जीवों के हृदय में स्थित अज्ञान, संशय और सांसारिक मोह का विनाश अत्यन्त कोमल एवं आनंदमय रीति से करते हैं।
लौकिक सूर्य केवल बाह्य अन्धकार का नाश करता है, परन्तु श्री शठकोप स्वामी अज्ञानरूपी उस आन्तरिक अन्धकार का नाश करते हैं, जिसे मिटाना दुर्गम माना जाता है। इसी कारण श्री शठकोप स्वामी को श्रद्धापूर्वक “उदयभास्कर” इस दिव्य नाम से वन्दन किया जाता है।
अडियेन् श्यामसुंदर रामानुज दास
आधार – https://granthams.koyil.org/2026/07/07/nammazhwars-divine-names-parankusa-udhayabhaskara/
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